अटलांटा, 31 अक्टूबर। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए कूटनीति को प्राथमिकता देने की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सैन्य कार्रवाई से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता, इसलिए कूटनीति को अपना मौका दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने समुद्री मार्गों पर जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं का सबसे ज्यादा असमान असर वैश्विक दक्षिण के विकासशील देशों पर पड़ रहा है। शुक्रवार को जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले पूर्ण सत्र में हिस्सा लेने के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच सैन्य समाधान कारगर नहीं होंगे और कूटनीति को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए।
समुद्री हमलों से ईंधन और खाद्य सुरक्षा पर खतरा
जयशंकर ने नागरिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों पर हमलों का खामियाजा विकासशील देशों को असमान रूप से भुगतना पड़ रहा है। इससे ईंधन, खाद्य सामग्री और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। साथ ही इन जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कानून और विशेष रूप से समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) के तहत नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। उन्होंने समुद्री हमलों को तत्काल रोकने की अपील भी की। जयशंकर ने बताया कि भारत और लाइबेरिया ने नाविकों की सुरक्षा के लिए संयुक्त पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को मजबूत करना है।
व्यापार में असंतुलन पर विकासशील देशों की आवाज उठाई
जी-20 बैठक में विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी विकासशील देशों का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बाजारों में जरूरत से ज्यादा वस्तुओं की आपूर्ति, आपूर्ति शृंखलाओं को हथियार की तरह इस्तेमाल करना, बाजार तक पहुंच सीमित करना और व्यापारिक असंतुलन को बढ़ावा देना विकासशील देशों के औद्योगीकरण के अधिकार को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यापारिक बाधाओं को समाप्त किया जाना चाहिए। जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में जोखिम कम करने और व्यापारिक निर्भरता को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने के प्रयासों के साथ मजबूत वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया।
आतंकवाद के खिलाफ सतर्क रहने की दी चेतावनी
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि सामरिक और तात्कालिक हितों के चलते आतंकवाद के खतरों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि आतंकवाद एक बेहद जोखिम भरा कदम है और इसे बढ़ावा देने वालों को भी अंततः इसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। हालांकि, इस टिप्पणी में उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया।
मार्को रूबियो ने की समुद्री और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा
जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के इस सत्र की मेजबानी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने की। बैठक के बाद उन्होंने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि समुद्री और खाद्य सुरक्षा आर्थिक सुरक्षा को आगे बढ़ाती हैं। उनके शुरुआती संबोधन के उपलब्ध प्रतिलेख के अनुसार, सत्र में नौवहन की स्वतंत्रता और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इससे पहले जयशंकर ने बैठक में शामिल विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों के साथ तस्वीरें साझा की थीं। उन्होंने अटलांटा में अपने अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के साथ मुलाकात को लेकर जानकारी दी थी।
शनिवार को खत्म होगी बैठक, क्वाड मंत्रियों से भी करेंगे चर्चा
दो दिवसीय जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक शनिवार को समाप्त होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, जयशंकर इस दौरान क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा उनके कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें करने का कार्यक्रम है। इन बैठकों में आपसी सहयोग और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।


