नवरात्र के अंतिम दिन पीएम मोदी ने मां सिद्धिदात्री को किया नमन, साझा किया देवी स्तुति का भजन

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप को नमन किया। सोमवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देवी वंदना से जुड़ा एक भजन साझा किया और मां के आशीर्वाद से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, यश और कीर्ति की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “त्याग और तप की देवी मां महागौरी के आशीष से सबका भविष्य उज्ज्वल हो। हर किसी को जीवन में यश और कीर्ति की प्राप्ति हो, यही कामना है।” हालांकि, पोस्ट में मां महागौरी का उल्लेख किया गया, जबकि नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। पीएम मोदी ने देवी दुर्गा की वंदना ‘नारायणी नमस्तुते’ का यूट्यूब लिंक भी साझा किया। इस भजन में वीरेंद्रकृष्ण भद्र की आवाज में मां की स्तुति और देवी की महिमा का वर्णन किया गया है।

पीएम मोदी ने साझा किया दुर्गा कवच का संस्कृत श्लोक

इससे पहले प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में श्रीदेवीकवचम् का संस्कृत श्लोक साझा किया। श्लोक है, “यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते। ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः।” इसका भावार्थ है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक देवी दुर्गा का स्मरण करते हैं, उनकी उन्नति होती है। देवी का चिंतन करने वाले भक्तों की वह संकटों से रक्षा करती हैं। यह श्लोक दुर्गा कवच के आठवें श्लोक के रूप में वर्णित है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा का क्या है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ‘सिद्धि’ का अर्थ पूर्णता या विशेष सामर्थ्य और ‘दात्री’ का अर्थ प्रदान करने वाली है। मान्यता है कि देवी अपने भक्तों को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व नामक आठ सिद्धियां प्रदान करती हैं। मां सिद्धिदात्री को सिंह पर सवार बताया गया है। उनकी चार भुजाएं हैं। उनके दाहिने हाथों में गदा और चक्र तथा बाएं हाथों में कमल और शंख सुशोभित रहते हैं। धार्मिक परंपरा में उनका यह स्वरूप शक्ति, सिद्धि और दिव्य ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

मां सिद्धिदात्री की कृपा से अर्धनारीश्वर बने शिव

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से अनेक सिद्धियां प्राप्त की थीं। यह भी मान्यता है कि देवी की कृपा से शिव के स्वरूप में शक्ति का समावेश हुआ और वे अर्धनारीश्वर कहलाए। अर्धनारीश्वर स्वरूप शिव और शक्ति की अभिन्नता तथा सृष्टि में स्त्री और पुरुष ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति आराधना पर्व का समापन होता है।

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