श्रीनगर, 29 सितम्बर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंगलवार को विधायकों, मंत्रियों और पूर्व विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी से जुड़े विधेयक वापस ले लिए। सरकार ने यह कदम मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों के उस तार्किक विरोध के बाद उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक दिहाड़ी मजदूरों और अन्य श्रमिकों को नियमित नहीं किया जाता, तब तक वे अपने वेतन में बढ़ोतरी नहीं चाहते।
वित्त मंत्रालय का भी पोर्टफोलियो संभालने वाले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन तीन विधेयकों में से पहला विधेयक पेश किया तो भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने इस पर चर्चा करते हुए कहा कि जब दिहाड़ी मजदूरों की बेरोजगारी और अन्य श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है, तो ऐसे में वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव पर विधायिका को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ता है।
दिलचस्प तो यह रहा कि शाम लाल शर्मा उस हाउस पैनल (संसदीय समिति) के अध्यक्ष थे, जिसने पिछले वर्ष विधायकों, मंत्रियों और पूर्व विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था।
खैर, सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब तक इस विधेयक को पारित करने पर पूरे सदन में एकराय नहीं बन जाती, तब तक वह इसे पास कराने पर जोर नहीं देंगे और इसे वापस ले लेंगे। उन्होंने कहा कि वह भाजपा को इस वेतन बढ़ोतरी पर राजनीति नहीं करने देंगे क्योंकि बाद में उनके विधायक भी बढ़ी हुई सैलरी का लाभ लेंगे।
भाजपा इसके बावजूद अपनी असहमति पर अड़ी रही। इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह विधेयक वापस ले रहे हैं। जब विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने विधेयक को वापस लेने के लिए मतदान कराया तो विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ने इस वापसी का विरोध किया।


