नई दिल्ली, 21 सितम्बर। सरकार ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच से संबंधित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट का विवरण सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के विवरण में यह उल्लिखित है कि चढ़ावा चोरी की 105 घटनाएं मंदिर के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई हैं।
दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए आवंटित धनराशि के कथित गबन की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांच की मांग करने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहा था।
इसी क्रम में चढ़ावा चोरी मामला भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ के समक्ष आया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दान चोरी की जांच से संबंधित एसआईटी की रिपोर्ट का विवरण प्रस्तुत किया।
25 सितम्बर के पहले चार्जशीट दाखिल करनी होगी
तुषार मेहता ने कहा, ‘पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिन 25 सितम्बर को पूरे होने वाले हैं, इसलिए हमें चार्जशीट दाखिल करनी होगी, अन्यथा उन्हें (आरोपितों को) जमानत मिल जाएगी।’ पीठ ने मजिस्ट्रेट को कानून के अनुसार आरोपपत्र पर काररवाई करने का निर्देश दिया।
शीर्ष न्यायालय ने सीलबंद लिफाफे में प्राप्त रिपोर्ट का अवलोकन भी किया
शीर्ष न्यायालय ने सीलबंद लिफाफे में एसआईटी द्वारा प्रस्तुत विस्तृत स्थिति रिपोर्ट का भी अवलोकन किया। इससे पहले, न्यायालय ने एसआईटी को अपनी जांच शीघ्रता से पूरी करने और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए कहा था और एसआईटी को दान चोरी मामले की जांच में हुई प्रगति पर सीलबंद लिफाफे में अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
स्थिति रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज और अन्य सामग्रियों का उपयोग करके आरोपितों की पहचान करने का विवरण दर्ज किया गया। रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से दान की चोरी की 105 घटनाओं की पहचान की गई, जो आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करती हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ आरोपितों की पहचान सीसीटीवी फुटेज में की जा सकती है और सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और सीडीआर महत्वपूर्ण सबूत हैं। बेंच ने अनुरोध किया कि आरोपपत्र अदालत में दाखिल होने के बाद उसकी एक प्रति उसके समक्ष प्रस्तुत की जाए।
पीठ ने गौर किया कि स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, दान की गिनती और प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और मिलान अभिलेखों से संबंधित प्रासंगिक मानक संचालन प्रक्रियाओं और अभिलेखों की वर्तमान जांच के लिए प्रासंगिक सीमा तक विधिवत जांच की गई है।
पीठ ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि एसआईटी स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से जांच कर रही है, और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का मूल्यांकन एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर किया जा रहा है। पीठ ने गौर किया कि जांच सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी, बैंक और वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति और वाहन रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, कॉल विवरण रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, फोरेंसिक जांच और फोरेंसिक ऑडिट सहित साक्ष्य के कई स्रोतों के आधार पर आगे बढ़ी है।
14.09.2026 तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके
पीठ ने टिप्पणी की, ‘14.09.2026 तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इन गवाहों में ट्रस्ट के पदाधिकारी, लेखा कर्मी, बैंकिंग अधिकारी, सुरक्षाकर्मी, सीसीटीवी ऑपरेटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, विक्रेता, संपत्ति लेनदेन से जुड़े व्यक्ति और जांच के दायरे में आने वाले मामलों से संबंधित अन्य व्यक्ति शामिल हैं।’
86 मूल्यवान वस्तुएं ऐसी हैं, जिनके लिए रसीदें जारी नहीं की गई
पीठ ने गौर किया कि स्थिति रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि मीडिया और सोशल मीडिया में रिपोर्ट किए गए मूल्यवान दान से संबंधित विशेष आरोपों का विधिवत सत्यापन किया गया है। इन आरोपों में 200 किलोग्राम चांदी की ईंटें, 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटें, चांदी का हार, चरण पादुका और रामचरितमानस से संबंधित दान शामिल हैं। पीठ ने गौर किया कि 86 मूल्यवान वस्तुएं ऐसी हैं, जिनके लिए रसीदें जारी नहीं की गई हैं और इन वस्तुओं की अलग से पहचान की गई है और भौतिक रूप से उनका सत्यापन किया गया है।
803 मूल्यवान वस्तुओं के लिए जारी की गई रसीदों के सत्यापन में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई
अदालत के आदेश में यह उल्लेख किया गया है, ‘उक्त रिपोर्ट से पता चलता है कि टीसीएस सॉफ्टवेयर द्वारा 803 मूल्यवान वस्तुओं के लिए जारी की गई रसीदों का सत्यापन किया गया है और उनसे संबंधित रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास पाए गए हैं। ये वस्तुएं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक लॉकर में रखी हैं, जिसकी भौतिक जांच की गई थी। इन 803 वस्तुओं के संबंध में, सत्यापन के दौरान कोई विसंगति नहीं पाई गई।’
पीठ ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज और अन्य सामग्रियों के विश्लेषण का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिससे आठों आरोपितों की पहचान की गई है। इसमें उनके खातों में जमा अज्ञात धनराशि का सारणीबद्ध सारांश और उन अचल और चल संपत्तियों की जानकारी भी दी गई है जिनमें चोरी की गई धनराशि का निवेश किया गया था। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में अब तक किए गए वसूली प्रयासों को दर्शाने वाला एक चार्ट भी शामिल है।


