नई दिल्ली, 3 सितम्बर। देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। घरों और मंदिरों की सजावट से लेकर बाजारों में खरीदारी तक, त्योहार का उत्साह साफ नजर आ रहा है। इसी बीच कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने अनुमान जताया है कि इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है।
सीएआईटी के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान करीब 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था, जो 2025 में बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया। इस वर्ष ग्राहकों की बढ़ती मांग, धार्मिक पर्यटन, बड़े पैमाने पर होने वाले आयोजन, मॉडर्न रिटेल और डिजिटल कॉमर्स के विस्तार के चलते कारोबार में करीब 30 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल भक्ति और आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का भी बड़ा केंद्र है। उनके मुताबिक जन्माष्टमी में आस्था सीधे तौर पर व्यापार और रोजगार से जुड़ती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान का असर त्योहारों के बाजार में दिखाई दे रहा है। पूजा सामग्री, सजावट, धार्मिक उत्पादों और हस्तशिल्प सहित भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इससे स्थानीय व्यापारियों, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्पकारों और एमएसएमई को फायदा मिल रहा है।
जन्माष्टमी से जुड़े कारोबार का दायरा भी काफी व्यापक है। माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के साथ मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, फूल-मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और विशेष कपड़ों की मांग बढ़ जाती है।
इस आर्थिक गतिविधि से किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई कारोबारी, कपड़ा व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट संचालक समेत बड़ी संख्या में लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।
सीएआईटी का कहना है कि जन्माष्टमी के दौरान धार्मिक पर्यटन भी कारोबार को गति देता है। मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा सहित देश के प्रमुख कृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इससे होटल, परिवहन, रेस्टोरेंट, प्रसाद, फूल, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय त्योहारों को केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन के रूप में देखना उनके व्यापक महत्व को सीमित करना होगा। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ और छठ जैसे त्योहार लाखों व्यापारियों, कारीगरों, किसानों, महिला उद्यमियों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसर पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि त्योहारों पर होने वाला खर्च केवल उपभोग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आय और रोजगार के रूप में समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचता है। यही प्रक्रिया भारत की जमीनी, समावेशी और विकेंद्रीकृत ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ को मजबूती देती है।


