पश्चिम बंगाल : फाल्टा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी देबांग्शु पांडा 1.09 लाख वोट से विजयी
कोलकाता, 24 मई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी देबांगशु पांडा ने रविवार को हुई मतगणना में पश्चिम बंगाल में साउथ 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट पर 1.09 लाख यानी 71.20 प्रतिशत मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे।
EC ने फाल्टा के सभी 285 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया था
उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में फाल्टा में गत 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। लेकिन कुछ बूथों पर ईवीएम पर इत्र, स्याही और चिपकने वाली टेप का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बाद वहां पुनर्मतदान का आदेश दिया गया था।
21 मई को हुए दोबारा मतदान में 87 फीसदी से ज्यादा मत पड़े थे
बाद में हुई जांच में मतदान केंद्रों से वेबकैमरा फुटेज के साथ छेड़छाड़ के कथित प्रयासों का भी खुलासा हुआ, जिसके कारण निर्वाचन आयोग ने सभी 285 बूथों पर पुनर्मतदान कराये जाने का आदेश दिया था। उसी कड़ी में फाल्टा में 2.36 लाख मतदाताओं के बीच 21 मई को हुए दोबारा मतदान में 87 फीसदी से ज्यादा मत पड़े थे।
पुनर्मतदान से दो दिन पहले ही जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने की घोषणा की थी, जिसे टीएमसी ने उनका निजी फैसला बताया था। हालांकि जहांगीर खान की चुनाव न लड़ने की घोषणा का कोई मतलब नहीं था क्योंकि चुनावी प्रक्रिया के तहत वह टीएमसी उम्मीदवार के रूप में बरकरार थे।
देबांग्शु को मिले 1,49,666 वोट
आज 22 राउंड तक चली मतगणना के बाद देबांग्शु पांडा को 1,49,666 वोट मिले, जबकि माकपा के शंभू नाथ कुर्मी 40,645 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला 10,084 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। कुल 2.36 लाख मतदाताओं वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में खान को महज 7,783 वोट मिले। उल्लेखनीय है कि टीएमसी का 2011 से लगातार इस सीट पर कब्जा था और 2021 में पार्टी ने लगभग 57 प्रतिशत मतों के साथ जीत हासिल की थी।
294 में से 208 सीटों पर भाजपा का कब्जा
इस प्रकार फाल्टा सीट के परिणाम के साथ ही बंगाल विधानसभा की चुनावी प्रक्रिया पूरी हो गई। कुल 294 सीटों में से सत्तारूढ़ भाजपा ने सर्वाधिक 208 सीटें जीतीं जबकि टीएमसी 80 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं कांग्रेस व एजजेयूपी को दो-दो सीटें मिलीं जबकि सीपीआई (एम) और एआईएसएफ को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा।
