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पीएम मोदी ने मंत्रियों संग 4.30 घंटे तक की बैठक, मिडिल ईस्ट संकट समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा

पीएम मोदी ने मंत्रियों संग 4.30 घंटे तक की बैठक, मिडिल ईस्ट संकट समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा

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नई दिल्ली, 21 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच देशों की यात्रा से वापसी के कुछ घंटे बाद गुरुवार की शाम अपने सभी मंत्रियों के साथ एक बड़ी बैठक की। लगभग साढ़े चार घंटे तक चली बैठक में मिडिल ईस्ट संकत से लेकर देश की तरक्की से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर बात हुई। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों का काम देखा गया और आगे की रणनीति तय की गई।

पीएम मोदी के आवास ‘सेवा तीर्थ’ में शाम पांच बजे शुरू हुई बैठक रात्रि लगभग 9.30 बजे खत्म हुई। इसमें केंद्र सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और बाकी राज्यमंत्री भी शामिल हुए। यह इस वर्ष की पहली पूरी कैबिनेट बैठक थी। साथ ही यह उस वक्त हुई, जब मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने वाले हैं।

सूत्रों के अनुसार यह बैठक सरकार का एक तरह का ‘मिड-टर्म रिव्यू’ था। अलग-अलग मंत्रालयों ने क्या किया, पिछले कुछ महीनों में कौन से बड़े फैसले लिए गए, उनका नतीजा क्या रहा और आगे क्या करना है, इन सब मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।

9 मंत्रालयों ने अपने कामकाज का ब्योरा रखा

बैठक के दौरान नौ मंत्रालयों ने अपने कामकाज का ब्योरा पेश किया। सबसे पहले कॉमर्स मंत्रालय ने प्रेजेंटेशन दी। इसके बाद पेट्रोलियम, गृह मंत्रालय, वित्त और विदेश मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालयों के काम का भी रिव्यू हुआ।

मंत्रालयों से पहले ही कहा गया था कि वे अपने सुधारों को चार हिस्सों में बांटकर बताएं। पहला, कानून में बदलाव। दूसरा, नियमों में बदलाव। तीसरा, नीति में बदलाव। और चौथा, काम करने के तरीके में बदलाव। साथ ही यह भी बताना था कि इन बदलावों का आम लोगों पर क्या असर पड़ा।

पीएम मोदी ने मंत्रियों को दिए ये निर्देश

पीएम मोदी ने मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि 2047 को ध्यान में रखकर काम करें। यानी भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनाने का जो लक्ष्य है, उसे हमेशा सामने रखें। उन्होंने ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने पर और सुधारों पर जोर दिया। बड़ी सरकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर फोकस रहा कि काम ठीक से हो रहा है या नहीं और मंत्रालयों के बीच तालमेल कैसा है।

पश्चिम एशिया संकट पर भी हुई बात

इस समय मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया में जो तनाव चल रहा है, उसका असर भारत की इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है. बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा कि ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे इस संकट की वजह से आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो। खासतौर पर एनर्जी, खेती, खाद, एविएशन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों पर खास ध्यान दिया गया।

उल्लेखनीय है कि पहले से ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में मंत्रियों का एक ताकतवर अनौपचारिक समूह इस मिडिल ईस्ट संकट पर नजर रख रहा है। हालांकि राजनाथ सिंह गुरुवार की बैठक में नहीं थे क्योंकि वे दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं। इसी तरह स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी जिनेवा में होने के चलते बैठक में नहीं आ सके।

विदेश मंत्री ने पीएम मोदी के 5 देशों के दौरे की जानकारी दी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में पीएम मोदी की हाल की पांच देशों की विदेश यात्रा के बारे में सभी मंत्रियों को जानकारी दी। इस दौरे में क्या हासिल हुआ और आगे के लिए क्या रास्ता बना, यह सब बताया गया।

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