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ऑनलाइन बाल यौन शोषण केस में बड़ा फैसला : दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपियों को राहत देने का आदेश पलटा

ऑनलाइन बाल यौन शोषण केस में बड़ा फैसला : दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपियों को राहत देने का आदेश पलटा

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नई दिल्ली, 7 अप्रैल। ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज से जुड़े मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दो आरोपियों, रमन कुमार और संदीप सिंह उर्फ लवली, को आरोपमुक्त (डिस्चार्ज) किया गया था। हाई कोर्ट ने 4 अप्रैल 2026 के अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय (फ्रेमिंग ऑफ चार्जेज) किए जाएं। सीबीआई की ओर से सोमवार को जारी एक प्रेस नोट में यह जानकारी दी गई।

सीबीआई की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह केस केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें मुख्य आरोपी रमन गौतम और अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर बच्चों से जुड़े अश्लील और शोषणकारी कंटेंट (बाल यौन शोषण सामग्री – सीएसएएम) के प्रसार का आरोप है। जांच में यह सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लिंक, वीडियो, तस्वीरें, टेक्स्ट और पोस्ट शेयर कर रहे थे, साथ ही ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट को होस्ट भी कर रहे थे। सीबीआई ने जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं और पोक्सो एक्ट की धारा 15(2) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपियों को पोक्सो एक्ट की धारा 15(2) से बरी कर दिया था कि कथित अश्लील वीडियो में दिख रहे बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है और उनकी उम्र निर्धारित करने के लिए आवश्यक मानदंड पूरे नहीं किए गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस तर्क को अस्वीकार करते हुए उसके आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। इस फैसले के बाद अब निचली अदालत में दोनों आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा चलेगा।

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