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तुहिन कांत पांडेय ने सेबी चेयरमैन का कार्यभार संभाला, शेयर बाजार में हाहाकार के बीच पारदर्शिता का वादा

तुहिन कांत पांडेय ने सेबी चेयरमैन का कार्यभार संभाला, शेयर बाजार में हाहाकार के बीच पारदर्शिता का वादा

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मुंबई, 1 मार्च। वरिष्ठ नौकरशाह एवं अब तक वित्त सचिव के रूप में कार्य कर रहे तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 11वें चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाल लिया। केंद्र सरकार ने बीते गुरुवार को उनकी नियुक्ति की थी। उन्होंने माधबी पुरी बुच की जगह ली, जिनके कार्यकाल का शुक्रवार को अंतिम दिन था।

देखा जाए तो 59 वर्षीय तुहिन कांत ने ऐसे समय में सेबी के प्रमुख का पद संभाला है, जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बाद शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। जनवरी से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।

नए चेयरमैन का ‘टीम-वर्क’ पर ध्यान केंद्रित करने का वादा

वस्तुतः नए सेबी चेयरमैन के लिए बाजार की ऐतिहासिक गिरावट एक बड़ी चुनौती होगी और इस बिगड़े माहौल में निवेशकों को सुरक्षा और भरोसा देने की जिम्मेदारी होगी। खैर, उन्होंने पारदर्शिता और ‘टीम-वर्क’ पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया। उन्होंने सेबी को एक ऐसा ‘मजबूत बाजार संस्थान’ बताया, जिसे वर्षों से विभिन्न दिग्गजों ने आकार दिया है।

पूर्ववर्ती माधबी पुरी बुच को लेकर किसी टिप्पणी से इनकार

अपने कार्य-एजेंडे या कार्यशैली के बारे में बताने से इनकार करते हुए माधबी पुरी बुच के उत्तराधिकारी तुहिन कांत ने कहा कि वह किसी पर टिप्पणी नहीं करेंगे। उल्लेखनीय है कि बुच पर उनके कार्यकाल के अंतिम कुछ महीनों में अनियमितताओं के कई आरोप लगे थे।

दिलचस्प यह रहा कि पांडेय के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) व्यावसायिक जिले में सेबी मुख्यालय पहुंचने पर बुच मौजूद नहीं थीं। बताया जाता है कि वह अस्वस्थ हैं और उन्हें कोविड संक्रमण है। खैर, सेबी के सभी चार पूर्णकालिक सदस्यों – अश्विनी भाटिया, अमरजीत सिंह, अनंत नारायण और कमलेश वार्ष्णेय ने सेबी मुख्यालय में पांडेय का स्वागत किया।

‘सेबी को सबसे अच्छे बाजार संस्थानों में से एक बनाना जारी रखेंगे’

तुहिन कांत ने संवाददाताओं से कहा, ‘सेबी एक बहुत मजबूत बाजार संस्था है। इसे वर्षों से लगातार अग्रणी लोगों के साथ बनाया गया है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।’ उन्होंने अपने उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए चार टी- विश्वास (ट्रस्ट), पारदर्शिता (ट्रांसपेरैंसी), टीमवर्क और प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) को अपने मुख्य ध्यान वाले क्षेत्रों के रूप में बताया।

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ये चार तत्व हमें (सेबी) विशिष्ट बनाते हैं, और हम इसे दुनिया में सबसे अच्छे बाजार संस्थानों में से एक बनाना जारी रखेंगे।’ गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में सेबी में कुछ गतिविधियां देखने को मिली हैं, जहां इसके कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है।

वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग संभालने वाले वरिष्ठष्तम अधिकारी

निशिकांत ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1987 बैच के अधिकारी हैं और उनका कार्यकाल तीन वर्ष का है। वह वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग को संभालने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सचिव थे। दीपम वित्त मंत्रालय का एक विभाग है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों में सरकारी इक्विटी का प्रबंधन करता है।

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