नई दिल्ली, 10 सितम्ब। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक गतिविधि की योजना बनाने से पहले पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त देखे जाते हैं। 10 सितंबर 2026, गुरुवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी।
10 सितंबर को चतुर्दशी के बाद शुरू होगी अमावस्या
पंचांग के अनुसार, 10 सितंबर को चतुर्दशी तिथि सुबह 10:34 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन सिद्ध योग और मघा नक्षत्र का संयोग बन रहा है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने, भगवान शिव का ध्यान करने और मंत्र जाप करने की परंपरा है। माना जाता है कि शिव आराधना से मानसिक शांति और सुख-शांति की कामना की जाती है।
मघा नक्षत्र में पितरों का स्मरण करना शुभ
10 सितंबर को मघा नक्षत्र दोपहर 2:06 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में मघा नक्षत्र का संबंध पितरों और पूर्वजों से माना जाता है। ऐसे में इस दिन पितरों का स्मरण, जरूरतमंदों को दान और सेवा करना पुण्यकारी माना जाता है।
10 सितंबर 2026 का सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 5:43 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:09 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 4:39 बजे
- चंद्रास्त: शाम 5:37 बजे
- मघा नक्षत्र: दोपहर 2:06 बजे तक
- सिद्ध योग: शाम 7:17 बजे तक
जानें अभिजित मुहूर्त और राहुकाल
किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। 10 सितंबर को अभिजित मुहूर्त सुबह 11:32 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। वहीं, इस दिन राहुकाल दोपहर 1:29 बजे से 3:02 बजे तक रहेगा। परंपरा के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
- Abhijit Muhurat: 11:32 AM से 12:20 PM
- Rahu Kaal: 1:29 PM से 3:02 PM
- Gulika Kaal: 8:49 AM से 10:22 AM
- Yamaganda: 5:43 AM से 7:16 AM
सूर्य और चंद्रमा सिंह राशि में रहेंगे
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 10 सितंबर 2026 को सूर्य और चंद्रमा दोनों सिंह राशि में स्थित रहेंगे। पंचांग में ग्रहों की स्थिति, तिथि, नक्षत्र और योग को दिन के धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व के आकलन में देखा जाता है।
गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल
गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। अगर यात्रा आवश्यक हो, तो परंपरा के अनुसार उचित उपाय करने की मान्यता भी है।


