Ganesh Chaturthi 2026: पहाड़ की चोटी पर विराजते हैं भगवान गणेश, 437 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं दर्शन

लखनऊ, 10 सितंबर। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और उनके मंदिरों के दर्शन के लिए विशेष माना जाता है। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का उत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा और करीब 10 दिनों तक चलेगा। इस दौरान देशभर के गणेश मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है।

अगर आप गणेश चतुर्थी के दौरान किसी ऐसे मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, जहां धार्मिक आस्था के साथ अनोखी भौगोलिक स्थिति और पौराणिक कथा भी जुड़ी हो, तो तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थित उच्ची पिल्लयार मंदिर खास हो सकता है। यह मंदिर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 437 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर बना है गणेश मंदिर

उच्ची पिल्लयार मंदिर की सबसे खास बात इसका स्थान है। यह सामान्य मंदिरों की तरह समतल जमीन पर नहीं, बल्कि तिरुचिरापल्ली की रॉक फोर्ट पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर बनी सीढ़ियों से ऊपर जाना पड़ता है। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद आसपास के क्षेत्र का खूबसूरत और विस्तृत नजारा दिखाई देता है। मंदिर से तिरुचिरापल्ली शहर के अलावा श्रीरंगम द्वीप और रॉक फोर्ट ब्रिज का दृश्य भी देखा जा सकता है। यही वजह है कि यहां धार्मिक यात्रा के साथ प्राकृतिक और भौगोलिक अनुभव भी जुड़ जाता है।

भगवान राम, विभीषण और गणेश से जुड़ी है पौराणिक कथा

उच्ची पिल्लयार मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यता भगवान राम, रावण के भाई विभीषण और भगवान गणेश से संबंधित है। धार्मिक कथा के अनुसार, रावण के वध के बाद भगवान राम ने विभीषण को भगवान विष्णु के स्वरूप रंगनाथ की प्रतिमा दी थी। विभीषण इस प्रतिमा को लेकर लंका जा रहे थे। मान्यता थी कि प्रतिमा को जिस स्थान पर जमीन पर रखा जाएगा, वह वहीं स्थापित हो जाएगी। इसी वजह से विभीषण पूरी यात्रा के दौरान प्रतिमा को जमीन पर रखने से बच रहे थे।

बालक के रूप में विभीषण के सामने आए भगवान गणेश

कथा के अनुसार, जब विभीषण तिरुचिरापल्ली क्षेत्र में पहुंचे तो उन्हें कावेरी नदी दिखाई दी। वे स्नान करना चाहते थे, लेकिन प्रतिमा को संभालने की चिंता थी। इसी दौरान भगवान गणेश एक बालक का रूप धारण करके उनके सामने आए। विभीषण ने उस बालक को प्रतिमा सौंपते हुए कहा कि वह इसे जमीन पर न रखे। इसके बाद वे स्नान करने चले गए। मान्यता के अनुसार, विभीषण के जाते ही बालक ने प्रतिमा को जमीन पर रख दिया और वहां से पहाड़ी की ओर भागने लगा।

प्रतिमा नहीं हिला सके विभीषण, पहाड़ी की चोटी पर हुआ गणेश का प्रकट रूप

जब विभीषण वापस लौटे तो उन्होंने प्रतिमा को उठाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिली। उन्हें समझ आ गया कि प्रतिमा अब उसी स्थान पर स्थापित हो चुकी है।इसके बाद विभीषण उस बालक को खोजते हुए पहाड़ी की ओर गए। कथा के अनुसार, बालक पहाड़ी की चोटी पर पहुंचकर बैठ गया। विभीषण ने क्रोध में उसके सिर पर प्रहार किया। इसके बाद बालक ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और विभीषण को पता चला कि वह कोई सामान्य बालक नहीं, बल्कि भगवान गणेश थे। अपनी भूल का एहसास होने पर विभीषण ने उनसे क्षमा मांगी। मान्यता है कि भगवान गणेश ने उन्हें आशीर्वाद दिया और इसी घटना के बाद वे पहाड़ी की चोटी पर उच्ची पिल्लयार के रूप में विराजमान हुए।

गणेश चतुर्थी पर खास हो जाती है मंदिर की रौनक

गणेश चतुर्थी के दौरान उच्ची पिल्लयार मंदिर में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। मंदिर को सजाया जाता है और भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजन और गणेश प्रतिमा से जुड़ी शोभायात्रा के कारण मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से भर जाता है।

437 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं भगवान गणेश के दरबार

उच्ची पिल्लयार मंदिर की यात्रा उन लोगों के लिए भी खास हो सकती है, जो धार्मिक स्थलों के साथ कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी पर बनी करीब 437 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सीढ़ियों से ऊपर जाते समय जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, वैसे-वैसे तिरुचिरापल्ली और आसपास के इलाके का दृश्य भी ज्यादा विस्तृत दिखाई देता है।

त्रिचि से आसानी से पहुंच सकते हैं मंदिर

उच्ची पिल्लयार मंदिर तिरुचिरापल्ली शहर में स्थित है, इसलिए यहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, त्रिचि सेंट्रल बस स्टैंड करीब 4 किलोमीटर, त्रिचि जंक्शन रेलवे स्टेशन करीब 3 किलोमीटर और तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर है।

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