धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर CJP में जश्न, संस्थापक अभिजीत बोले- ‘अच्छे-अच्छों के इस्तीफे ले सकते हैं हम’
नई दिल्ली, 25 जुलाई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन की अगुआई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में जश्न का माहौल है। इस क्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। यह इस बात का सबूत है कि अगर आप डरते नहीं हैं, अगर आप इस सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो आप किसी से भी इस्तीफा दिलवा सकते हैं। लोकतंत्र में डरने की जरूरत नहीं है।’
‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए…।’
उल्लेखनीय है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले लगभग एक माह से यहां जंतर-मंतर पर सीजेपी के बैनर तले छात्र आंदोलन जारी था। आंदोलनकारियों ने मुख्य मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था। इस आंदोलन को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित अन्य तमाम संगठनों ने भी खुलकर समर्थन दिया। पिछले दिनों आंदोलनकारियों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की तीखी प्रतिक्रिया अब छात्रों का प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में फैलने लगा था। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद खुशी से झूमे अभिजीत दिपने ने सरकार पर तंज कसते हुए यह भी कहा- ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए…।’
View this post on Instagram
सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों से वापस जाने की अपील की
इसी क्रम में केंद्रीय मंत्रीद्वय जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह के साथ शनिवार को बातचीत के बाद सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों से वापस जाने की अपील की है। सीजेपी के प्रवक्ता अभिषेक रांका ने कहा कि उनकी मांगें मान ली गई हैं और प्रदर्शनकारी अपने घर वापस लौटें। उन्होंने कहा कि चार सप्ताह बाद फिर से वो मुलाकात करेंगे और अपनी मांगों और आगे शिक्षा में सुधार पर चर्चा करेंगे।
सोनम वांगचुक ने सरकार के कदम का स्वागत किया, बोले- यह लोकतंत्र की जीत
वहीं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, ‘आज जो हुआ, वह लोकतंत्र की जीत है और इसके लिए मैं देशवासियों को बधाई देता हूं।’

सोनम वांगचुक ने कहा, ‘मैं कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की टीम को भी बधाई और धन्यवाद देना चाहता हूं, जिसने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया। साथ ही उन वॉलंटियर्स का भी शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने उनका साथ दिया, और देशभर के उन छात्रों, युवाओं और बुजुर्गों का भी, जो लोकतंत्र के समर्थन में खड़े हुए।’
आंदोलन के दौरान खुद 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने के बाद सरकार के आश्वासनों पर अनशन तोड़ने वाले वांगचुक ने खास तौर पर आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखने के तरीके की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि आगे भी यही शांति बनी रहेगी और भविष्य में किसी तरह की ग़लत घटना नहीं होगी।’
‘सिर्फ इस्तीफे से देश नहीं बनता बल्कि सुधारों की जरूरत होती है’
सोनम वांगचुक ने कहा कि सिर्फ इस्तीफे़ से देश नहीं बनता बल्कि सुधारों की जरूरत होती है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार होना चाहिए और इस दिशा में आगे काम किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस उदारता के साथ सरकार ने यह कदम उठाया है, उसी तरह शिक्षा और शासन व्यवस्था में भी सुधार के लिए काम किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘अब देश को डर के नहीं, बल्कि प्यार और विश्वास के साथ चलाया जाना चाहिए और देश को अन्याय नहीं, बल्कि सच्चाई के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।’
