नई दिल्ली, छह नवम्बर। उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शनिवार (सात नवम्बर) को अयोध्या के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह दीपोत्सव 2026 में शामिल होंगे। इसी क्रम में उप राष्ट्रपति श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे। उप राष्ट्रपति अयोध्या में भगवान श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में भी हिस्सा लेंगे। इस अवसर पर वह श्रद्धेय संतों को सम्मानित भी करेंगे।
दीपोत्सव-2026 में लगाई जाएगी विशेष प्रदर्शनी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित 10वें दीपोत्सव-2026 में इस बार रामनगरी के इतिहास, श्रीराम मंदिर आंदोलन और अयोध्या के विकास की यात्रा को विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। संस्कृति विभाग की ओर से रामकथा पार्क में लगाई जाने वाली इस प्रदर्शनी में वर्ष 1500 ईस्वी से लेकर वर्तमान समय तक के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को दर्शाया जाएगा।
प्रदर्शनी में श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रमुख पुरोधाओं के योगदान को अभिनय आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ावों, मंदिर निर्माण की प्रक्रिया और वर्तमान भव्य स्वरूप तक की यात्रा को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मंदिर परिसर के विकास के साथ अयोध्या में हुए आधारभूत ढांचे के विस्तार, सड़कों, सुविधाओं और शहर के बदलते स्वरूप की कहानी भी इसमें शामिल रहेगी।
1500 ईस्वी से लेकर आधुनिक अयोध्या तक की यात्रा को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने की तैयारी
प्रदर्शनी में वर्ष 1500 ईस्वी से लेकर आधुनिक अयोध्या तक की यात्रा को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने की तैयारी है। इसमें रामनगरी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़े प्रसंगों के साथ श्रीराम मंदिर आंदोलन के विभिन्न चरणों को भी स्थान दिया जाएगा। आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुरोधाओं के योगदान को अभिनय के माध्यम से दर्शकों के सामने रखा जाएगा, जिससे लोग उस दौर की घटनाओं और उनसे जुड़े व्यक्तित्वों को करीब से समझ सकें।
श्रीराम मंदिर के निर्माण और परिसर के विकास को प्रदर्शनी का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा
श्रीराम मंदिर के निर्माण और परिसर के विकास को प्रदर्शनी का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा। इसके साथ ही अयोध्या में पर्यटन, आवागमन, जनसुविधाओं और शहरी आधारभूत ढांचे के विस्तार की तस्वीर भी दिखाई जाएगी। इस तरह प्रदर्शनी में एक ओर रामनगरी की ऐतिहासिक विरासत होगी तो दूसरी ओर वर्तमान समय में हो रहे विकास कार्यों की झलक देखने को मिलेगी। इसका उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि अयोध्या ने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए विकास की नई दिशा में किस तरह कदम बढ़ाए हैं।


