इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता आज : संयुक्त राष्ट्र ने किया स्वागत, शांति और स्थायी समझौते की अपील
इस्लामाबाद/जिनेवा, 11 अप्रैल । युद्ध विराम के लिए अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शनिवार को बैठक होने वाली है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति और ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंच गया है। बैठक की तैयारियां पूरी कर ली गई है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस्लामाबाद में शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने यह जानकारी दी।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने ब्रीफिंग में कहा, “वह दोनों पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे इस कूटनीतिक अवसर का लाभ उठाते हुए सद्भावना के साथ एक स्थायी और व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ें, जिसका उद्देश्य तनाव कम करना और शत्रुता की वापसी को रोकना हो।” दुजारिक ने कहा, “महासचिव इस बात को दोहराते हैं कि अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का कोई अन्य व्यवहार्य विकल्प नहीं है और यह समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है, के पूर्ण अनुपालन में होना चाहिए।”
दुजारिक ने आगे बताया कि मध्य पूर्व संघर्ष और उसके परिणामों के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के विशेष दूत, जीन अर्नाल्ट, कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन देने के लिए अभी भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बुधवार तड़के एक अस्थायी संघर्ष विराम (सीजफायर) पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद इजरायल ने लेबनान पर अपने हमले जारी रखे हैं। इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचा, ताकि अमेरिका के साथ होने वाली आगामी वार्ता में भाग ले सके।
इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भी शामिल हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार सुबह वार्ता शुरू होने का कार्यक्रम है। यह वार्ता मंगलवार को घोषित दो सप्ताह के सशर्त संघर्ष विराम की कूटनीतिक अवधि के दौरान होगी और यह ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों की शुरुआत के एक महीने से भी अधिक समय बाद हो रही है।
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच का संघर्ष विराम तनावपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि इजरायल लेबनान में ईरान समर्थित उग्रवादी समूह हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले कर रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ का कहना है कि लेबनान पर हमलों को रोकना इस संघर्ष विराम का एक अहम हिस्सा है।
