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अमेरिका ने ईरान की चौतरफा घेराबंदी की, एयरक्राफ्ट कैरियर व F-35 जेट ने संभाला मोर्चा

अमेरिका ने ईरान की चौतरफा घेराबंदी की, एयरक्राफ्ट कैरियर व F-35 जेट ने संभाला मोर्चा

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तेहरान/वॉशिंगटन, 31 जनवरी। अमेरिका ने ईरान पर हमले की तैयारी शुरू कर दी है। इस क्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान की   चौतरफा घेराबंदी कर दी है। अमेरिका के दर्जनों C-17 और C-5 मिलिट्री जहाज मिडिल ईस्ट में सैन्य ठिकानों पर सैन्य सामानों को उतार रहे हैं। इसके अलावा लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले ही मध्य पूर्व में पहुंच चुका है, जो फिलहाल उत्तरी अरब सागर में है।

USS अब्राहम लिंकन के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और कैरियर एयर विंग शामिल हैं, जिसमें F/A-18E सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट्स, F-35C लाइटनिंग II फाइटर जेट और EA-18G ग्राउलर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जेट के स्क्वाड्रन शामिल हैं। इनके अलावा यूएस नेवी इस एयरक्राफ्ट कैरियर से अलग तीन डिस्ट्रॉयर भी मौजूद हैं, जिनके नाम USS डेल्बर्ट डी. ब्लैक, USS मैकफॉल और USS मिट्शर हैं।

CNN ने अमेरिकी सेना के हवाले से कहा है कि बहरीन में तैनात तीन लिटोरल जंगी जहाज, यूएसएस सांता बारबरा, यूएसएस कैनबरा और यूएसएस तुलसा को माइनस्वीपिंग ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। आशंका है कि ईरान ने कई समुद्री मार्गों में माइंस बिछाए होंगे, जिन्हें ट्रैक करने के लिए यूएसएस तुलसा को तैनात किया जा सकता है।

 

ईरान को अमेरिका ने चारों तरफ से घेरा

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में कई एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए हैं, जिनमें अतिरिक्त टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। इन्हें पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में अल उदीद एयर बेस पर देखा गया है। 25 जनवरी को प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों में इनके देखे जाने की पुष्टि हुई है।

माना जा रहा है कि अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला कर सकता है, इन्हें रोकने के लिए इन एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान उनकी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं होता तो ‘अमेरिका का अगला हमला काफी बुरा होगा।’

ईरान पर चौतरफा हमला करने की तैयारी

अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन ईरान पर उत्तरी अरब सागर से हमला कर सकता है। इसके अलावा इसे इलाके में दूसरी जगहों पर चल रहे गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी ईरान पर हमला शुरू कर सकते हैं। हर एक युद्धपोत दर्जनों टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइलों से लैस हो सकते हैं, जिनकी रेंज 1000 मील से थोड़ी ज्यादा है और इनमें 1000 पाउंड का पारंपरिक वारहेड लगा होता है।

माना जा रहा है कि ईरान पर शुरुआती हमला टॉमहॉक मिसाइलों से ही होगा। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप आमतौर पर एक हमलावर पनडु्ब्बी के साथ चलते हैं। हालांकि पनडुब्बियों के होने या ना होने का खुलासा कभी नहीं किया जाता है।

कतर में लगातार उतर रहे सैन्य सामान्य: सीएनएन के मुताबिक एक E-11A विमान, गुरुवार को कतर के अल-उदीद एयर बेस पर उतरा है। जो अमेरिका के लिए मुश्किल ऑपरेशन्स को कोऑर्डिनेट करने के लिए सबसे जरूरी आखिरी अहम साजो सामान में से एक है। ये पहले एक बिजनेस जेट हुआ करता था, जिसे अब सैन्य एयरक्राफ्ट में बदल दिया गया है। अब ये एक हाई-एल्टीट्यूड कम्युनिकेशन रिले सिस्टम की तरह काम करता है, जो किसी भी एयरबोर्न या ज़मीनी फोर्स की मदद के लिए डेटा भेजता है।

कार्गो विमान मिडिल ईस्ट में कई जगह दिखे

अमेरिका का लड़ाकू सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने वाला मॉडिफायर कार्गो विमान भी गुरुवार को ही मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। इसके अलावा F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स का एक स्क्वाड्रन, जो गाइडेड बम और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस है, उसे भी हाल ही में प्लान्ड फोर्स रोटेशन के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में तैनात किया गया है।

समुद्रों से ईरान की घेराबंदी

अमेरिका के ड्रोन और टोही विमान लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में गश्त लगा रही हैं। सोमवार से, ये उड़ानें लगभग लगातार गति से चल रही हैं, जो कतर, बहरीन और यहां तक कि मध्य पूर्व के बाहर के अमेरिकी ठिकानों से शुरू हो रही हैं। RC-135 टोही विमान भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं, जो न्यूक्लियर रेडिएशन का पता लगाने के लिए है।

ईंधन भरने वाले एयरक्राफ्ट टैंकरों की स्पेन में तैनाती

इसके अलावा लड़ाकू विमानों में आसमान में ही ईंधन भरने के लिए कम से कम आठ एयरक्राफ्ट टैंकर ने गुरुवार को अटलांटिक सागर को पार किया है। ये दक्षिणी स्पेन में मोरोन एयर बेस पर उतरे हैं। सीएनएन के दौरान कई एयरक्राफ्ट टैंकरों ने ऐसे संदेश दिए गये हैं, जिनसे पता चलता है कि वे ट्रांसअटलांटिक उड़ान पर कम से कम सात अतिरिक्त छोटे विमानों की मदद के लिए हैं, जो शायद इलेक्ट्रॉनिक युद्ध या फाइटर मिशन के लिए सुसज्जित हैं।

फिलहाल यह साफ नहीं है कि दुनियाभर में और कहां-कहां से अमेरिकी सेना ऑपरेशन चलाने वाली है, लेकिन अमेरिका के दर्जनों बेस इन इलाकों में हैं। जून, 2025 में सात B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर मिसौरी में वाइटमैन एयर फोर्स बेस से ईरान के लिए 37 घंटे के मिशन पर उड़े थे और ईरान की तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर एक दर्जन से ज्यादा बम गिराए थे। पिछले जून में ईरानी परमाणु ठिकानों पर हुए हमले में एक गाइडेड-मिसाइल पनडुब्बी का भी इस्तेमाल किया गया था। अमेरिकी नौसेना के पास ओहियो-क्लास की चार गाइडेड-मिसाइल पनडुब्बियां हैं। ये कन्वर्टेड बैलिस्टिक-मिसाइल पनडुब्बियां हैं जिनके ठिकाने गुप्त रखे जाते हैं और ये 154 टॉमहॉक तक ले जा सकती हैं।

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