अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर साझा बयान जारी, अब 50 फीसदी की जगह 18 फीसदी टैरिफ लगेगा
नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 7 फरवरी। अमेरिका और भारत ने अंतरिम ट्रेड डील की औपचारिक घोषणा कर दी है। दोनों देशों की ओर से साझा बयान जारी किया गया है। इसके तहत भारत पर आज से 50 फीसदी की जगह 18 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा। रूस से तेल खरीदने को लगाया गया एक्स्ट्रा 25% टैरिफ को भी हटा दिया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गत दो फरवरी को भारत के साथ ट्रेड डील पर सहमति होने की घोषणा की थी। उस समय इस ट्रेड डील के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई थी लेकिन अब संयुक्त बयान जारी होने के बाद कई चीज़ें स्पष्टता से सामने आई हैं।
पीयूष गोयल बोले – यह डील 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खोलेगी
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा है कि यह डील भारतीय निर्यातकों, खासकर एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खोलेगी।
Under the decisive leadership of PM @NarendraModi ji, India has reached a framework for an Interim Agreement with the US. This will open a $30 trillion market for Indian exporters, especially MSMEs, farmers and fishermen. The increase in exports will create lakhs of new job… pic.twitter.com/xYSjxML6kt
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) February 7, 2026
ह्वाइट हाउस की ओर से जारी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बयान
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार ह्वाइट हाउस की ओर से जारी एक कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा, ‘भारत ने रूसी फेडरेशन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत ने कहा है कि वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा। इसके अलावा अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक समझौते पर सहमति जताई है।’
वॉशिंगटन के समयानुसार आज रात 12.01 बजे से लागू होगा नया टैरिफ
अमेरिका ने कहा कि वह भारत से आने वाले उत्पादों पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती करेगा। इस कटौती से भारतीय सामानों पर टैरिफ दर 18% रह जाएगी। 25% टैरिफ को हटाने का फैसला सात फरवरी को वॉशिंगटन के समयानुसार रात 12.01 बजे से लागू होगा। बयान के अनुसार, अंतरिम ट्रेड डील का एक फ्रेमवर्क तय हो गया है और कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं।
अंतरिम समझौते की 10 अहम बातें
- ट्रेड डील की शर्तों में कहा गया है कि भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करेगा।
- भारत सभी अमेरिकी टेक उत्पादों और कई अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म करेगा या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु आहार के लिए रेड ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन, स्पिरिट्स और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
- भारत की खरीद में अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान के साथ विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोयला शामिल होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी उत्पादों में भी व्यापार में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसमें डेटा सेंटरों के लिए उन्नत चिप्स शामिल हैं।
- इसके बावजूद भारत का निवेश समझौता अब भी अस्पष्ट बना हुआ है। 500 अरब डॉलर की खरीद पांच वर्षों में होगी और इसमें डेटा केंद्रों और ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल होंगे, साथ ही कुछ मौजूदा परियोजनाओं को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
- भारत के टेक्स्टाइल, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पादों पर अमेरिका में 18 फीसदी टैरिफ लगेगा।
- अमेरिका आगे चलकर जेनेरिक दवाओं, रत्न, हीरे, और विमान के पुर्जे समेत कई वस्तुओं पर शुल्क हटाएगा।
- फार्मा और उनके कच्चे माल को लेकर सेक्शन 232 जांच के नतीजों के आधार पर भारत को जेनेरिक दवाओं के लिए तय शर्तों पर लाभ मिलेगा।
- अमेरिका और भारत अपने-अपने हितों वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर प्राथमिक बाज़ार में पहुंच देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- दोनों देश ऐसे ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन तय करेंगे, जिससे समझौते के फायदे मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिलें।
- अमेरिका और भारत उन नॉन टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे, जो द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करते हैं। भारत अमेरिकी मेडिकल उपकरणों के व्यापार से जुड़ी पुरानी बाधाओं को दूर करने पर सहमत है। भारत सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से जुड़े अमेरिकी उत्पादों के लिए बाज़ार में प्रवेश में देरी करने वाली या मात्रा सीमित करने वाली आयात लाइसेंस प्रक्रिया को खत्म करेगा।
दोनों देश बातचीत के जरिए बाजार पहुंच को और बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे
बयान में ये भी कहा गया है कि अमेरिका और भारत बातचीत के जरिए बाजार पहुंच को और बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। अमेरिका ने कहा है कि बातचीत के दौरान वह भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम करने की मांग पर विचार करेगा।
दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के तालमेल को मजबूत करने पर सहमत
दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के तालमेल को मजबूत करने पर सहमत हैं ताकि सप्लाई चेन मज़बूत हो और इनोवेशन को बढ़ावा मिले। इसमें तीसरे पक्ष की ग़ैर-बाज़ार नीतियों से निबटने के लिए कदम, निवेश समीक्षा में सहयोग और निर्यात नियंत्रण से जुड़ा तालमेल भी शामिल होगा। दोनों देश मज़बूत, महत्वाकांक्षी और आपसी रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियमों के लिए एक स्पष्ट रास्ता तय करेंगे।
अमेरिका और भारत इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू करेंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे, ताकि तय रोडमैप के अनुरूप एक आपसी रूप से लाभकारी द्विपक्षीय वार्ता को पूरा किया जा सके।
किसान सुरक्षित, देश विकसित…
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी, फल, सब्ज़ियाँ, मसाले और अन्य अनाजों को संरक्षित किया गया है।
इससे घरेलू किसानों के हित सुरक्षित होंगे, स्थानीय कृषि को इतने बड़े बाजार में preferential access से मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक… pic.twitter.com/X0bMisAgYn
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) February 7, 2026
भारत की विपक्षी पार्टियां अमेरिका के साथ ट्रेड डील को भारतीय किसानों के खिलाफ बता रही थीं। लेकिन पीयूष गोयल ने कहा है, ‘यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के भारत के संकल्प को भी दिखाता है। इसके तहत संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। इनमें मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल ईंधन, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे उत्पाद शामिल हैं।’
President Trump is expanding American farmers and producers’ access to one of the largest economies in the world, with India committing to:
⬇️ Eliminate or lower tariffs for all U.S. industrial goods and a wide array of agricultural products
🚧 Address long-standing non-tariff… pic.twitter.com/ddG5j4V4n7— United States Trade Representative (@USTradeRep) February 6, 2026
दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेटेटिव के एक्स हैंडल पर जारी बयान में कहा गया है, ‘भारत ने कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म करने या कम करने की प्रतिबद्धता जताई है और लंबे समय से चली आ रही नॉन टैरिफ बाधाओं को दूर करने का वादा किया है।’
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक एफटीए के बाद आया है। इसके तहत दोनों ने कई वर्षों में आयातित वस्तुओं पर टैरिफ को लगभग शून्य तक घटाने पर सहमति जताई थी।
