भारत को मिला समर्थन : ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता प्रदान करने की वकालत की

नई दिल्ली, 4 जुलाई। पांच सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में शामिल होने की भारत की दावेदारी को ब्रिटेन का समर्थन मिला है, जिसने यूएनएससी में विस्तार पर साफ तौर पर कहा है कि इसमें भारत, जापान, जर्मनी, ब्राजील और अफ्रीकी देशों को शामिल किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन की स्थायी प्रतिनिधि बारबरा वुडवर्ड ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाए और इसमें भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान और अफ्रीकी प्रतिनिधित्व को स्थायी जगह दी जाए। यह सही समय है, जब सुरक्षा परिषद 2020 में दाखिल हो।’

चीन को छोड़ अन्य देश भारत की स्थाई सदस्यता के पक्ष में

फिलहाल इस ताकतवर समिति के पांच स्थाई सदस्य -अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन हैं। जुलाई महीने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता ब्रिटेन के पास है। इन देशों में चीन को छोड़कर बाकी सारे देश भारत की स्थाई सदस्यता के पक्ष में हैं। वुडवर्ड ने कहा कि भारत और ब्राजील सुरक्षा परिषद में विस्तृत प्रतिनिधत्व लेकर आएंगे। दोनों देशों में विशाल जनसंख्या है और दोनों देश तेजी से आर्थिक विकास कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली निकाय है सुरक्षा परिषद

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र का सबसे शक्तिशाली निकाय सुरक्षा परिषद है, जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा कायम रखना है। इसकी शक्तियों में शांति अभियानों का योगदान, अंतररीष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करना तथा सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से सैन्य काररवाई करना शामिल है। इसके सदस्य देशों के पास वीटो पॉवर होता है। वीटो पॉवर का अर्थ होता है कि मैं अनुमति नहीं देता हूं। स्थायी सदस्यों के फैसले से अगर कोई सदस्य सहमत नहीं है तो वह वीटो पॉवर का इस्तेमाल करके उस फैसले को रोक सकता है।

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1945 में हुआ था यूएनएससी का गठन

यूएनएससी का गठन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1945 में हुआ था। तब से लेकर अब तक दुनिया के हालात काफी बदल गए हैं। बदली हुई वैश्विक परिस्थितियों में चीन को छोड़कर बाकी सदस्य देश भारत को इस शक्तिशाली निकाय का सदस्य बनाना चाहते हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular