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ईरान अमेरिका युद्ध के बीच हमारे धैर्य और मानसिकता की परीक्षा

ईरान अमेरिका युद्ध के बीच हमारे धैर्य और मानसिकता की परीक्षा

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by Varsha Pargat

ईरान अमेरिका युद्ध हमारे घरों तक पहुंच गया है. पहले यह की 24 घंटे युद्ध की न्यूज़ हम देख रहे हैं. सारे न्यूज़ चैनल पर युद्ध की बात हो रही है. जिस तरह से खबरें बताई जा रही है वह देखते हुए ऐसा लगता है कि ईरान अमेरिका युद्ध 24 घंटे चल रहा है. 24 घंटे बम बरसा रहे हैं. क्या उनके पास इतने बम, मिसाइल है ? जो 24 घंटे तक एक दूसरों के ऊपर हमला करते रहेंगे.

दूसरी बात, युद्ध हमारे घरों तक आया है. एलपीजी सिलेंडर के माध्यम से. हम सारे न्यूज़ चैनल पर देख रहे हैं कि कैसे जगह-जगह पर लोगों की लंबी कतार  लगी है.  हम अब लगभग ₹60 ज्यादा देंगे प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलेंडर के लिए. कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी बड़े हैं .और सरकार ने कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगाई है. वह भी तब तक जब तक कोई दूसरी व्यवस्था हम नहीं कर लेते.

The Iran-US conflict tests our patience and mindset.

अब यह भी एक सवाल है कि सारे रेस्टोरेंट और होटल पर इसका परिणाम होगा. जो लोग स्पेशली बड़े-बड़े शहरों में रहते हैं उनको काफी बड़ी समस्या हो सकती है. लोग होटल के खाने पर डिपेंडेंट है. अपना व्यस्त जीवन और कामकाज की वजह से खाना बाहर से आर्डर करने की इन लोगों को आदत पड़ चुकी है. इसका मतलब यह हुआ की कमर्शियल एलपीजी सप्लाई भी अब जरूरी है.

 दूसरी तरफ सरकार दावा कर रही है कि सामान्य लोगों को कोई भी समस्या नहीं होगी. पर्याप्त मात्रा में एलपीजी सप्लाई हम करेंगे. लेकिन 2 दिन से जो खबरें आ रही है और लंबी Lines हम देख रहे हैं. एलपीजी सिलेंडर में आग लगाई है ऐसा हम कह सकते हैं और आग में तेल डालने का काम विपक्ष भी कर रहा है. संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है. सिलेंडर की अंतिम यात्रा निकाल रहे हैं. सत्ता और विपक्ष के दावे अलग है. सरकार यह बता रही है की स्थिति सामान्य होगी ,जब “स्ट्रेट का हारमोंस” खुलेगा.

 विपक्ष को एक अच्छा मौका मिला है सरकार को घेरने  का, अपनी राजनीति को बढ़ाने का. यह भी बात सच  हैं कि एलपीजी गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग हो रही है. हमने देश का इतिहास देखा है और हमारे देश का इतिहास यह बताता है कि जब भी इस तरह की समस्या खड़ी हुई तब कोई ना कोई वस्तु, उनकी ब्लैक मार्केटिंग होती रही. हमने सिलेंडर की बुकिंग की ब्लैक मार्केटिंग , केरोसिन, शुगर, चावल इन सारी चीजों की ब्लैक मार्केटिंग हुई  है. तब तो विपक्षी सत्ता में था.

 तो सवाल यह है कि क्या विपक्ष को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए काम नहीं करना चाहिए? या फिर जो समस्या है उसको और बढ़ाना चाहिए?. क्योंकि पूरी दुनिया इस समस्या से झुलज रही है. और हम भी उसमें से एक है. हम  सब जल्दी से भूल जाते हैं. सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर को घर तक  पहुँचाया . आसानी से LPG Cylinder पहुंचा. तब हमने ही सरकार की तारीफ की थी. आज जब सभी देश ऐसी समस्याओं से लड़ रहा है तो भी हम सरकार को दोषी मानते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार को कोशिश करनी चाहिए ब्लैक मार्केटिंग रोकने की साथ-साथ सप्लाई कैसे बिना कोई रुकावट शुरू रहे इसके ऊपर दक्षता रखकर काम करने की.

 एक और महत्वपूर्ण बात.  हमारे मानसिकता के बारे में कहनी पड़ेगी.क्या हम कभी इस तरह की एमरजैंसी सिचुएशन के लिए तैयार रहते हैं?. युद्ध अपने साथ कई तरह की समस्या लेकर आता है. अमेरिका हो या फिर कोई और यूरोपिय देश. तेल और गैस की आपूर्ति से जूझ रहे हैं. उनके देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए हैं. Gas सप्लाई भी कम हो रही है. पर क्या वहां के लोगों का धरना प्रदर्शन हमने देखा है? या फिर कोई न्यूज़ चैनल उसको दिखा रहा है?

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 दूसरे विश्व युद्ध के दौरान UK के प्रधानमंत्री ने जनता से आह्वान किया था. वह प्रधानमंत्री थे विंस्टन चर्चिल की “आप लोग Eggs कम खाए.क्योंकि सैनिकों को अंडे की जरूरत थी. तो जनता ने अपने घरों में से अंडे  थे ,वह वापस किए थे. जनता समस्या को समझी और अपना पूरा सहयोग दिया.

 हमारे घर की बात करते हैं 1965 में युद्ध हुआ था ,पाकिस्तान और हमारे बीच. तब प्रधानमंत्री थे लाल बहादुर शास्त्री. उन्होंने देश के लोगों को आह्वान  किया था कि “एक दिन का उपवास रखा जाए”. क्योंकि तब हमारा देश खाने  की आपूर्ति से जूझ रहा था. और जनता ने भी शास्त्री जी के आह्वान को सहयोग किया और देश ने एक दिन का उपवास रखना शुरू किया. आज एक पल के लिए भी सोच लीजिए कि अगर इस तरह का कोई आह्वान  शास्त्री जी करते तो क्या होता?

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क्या हम उनको पूरी तरह से सहयोग करते?. विपक्ष कहता कि “ सरकार तो असफल  गई है और  फायदा लेने के लिए वह आगे आते .तो आज अगर सरकार फिर से हमको इस तरह का कोई आवाहन करती है, तो हम कितना सहयोग कर पाएंगे?. बहुत बड़ा सवाल खड़ा होता है ?. सबसे पहले तो नो डाउट विपक्ष खड़ा होगा. सवाल उठेगा “क्या जनता भूखी रहेगी?”.”यह तो तानाशाही सरकार है”. दूसरी तरफ कुछ लोग विरोध करेंगे.

 “हमारी  ज़रूरतें पूरी नहीं करती है ,तो सरकार क्या कर रही है?” कल्पना करें क्या-क्या हो सकता है.आज हमारे धैर्य और मानसिकता की परीक्षा है. कोरोना काल  में हमने धैर्य और पॉजिटिव माइंडसेट का उदाहरण पेश किया था. जब  सब कुछ बंद था. लॉकडाउन लग गया था. तब हमने वह लड़ाई जीती थी. तो आज क्यों नहीं?. अभी तो सिर्फ एलपीजी सिलेंडर की समस्या है. पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ेगी तो क्या होगा?.

हम आशा करते हैं कि ऐसी समस्या ना हो .पर हम सभी को मानसिक रूप से तैयार रहने की कोशिश करनी पड़ेगी वरना देश को हम अराजकता की ओर लेकर जाएंगे और इसका फायदा देश विरोधी ताकत  लेकर जाएगी.

यह लेख आपको कैसा लगा? हमें यहाँ बताएं – varshapargat@yahoo.co.in

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