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तेलंगाना SCCL निविदा विवाद : BRS ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग, कांग्रेस ने दी बहस की चुनौती

तेलंगाना SCCL निविदा विवाद : BRS ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग, कांग्रेस ने दी बहस की चुनौती

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हैदराबाद, 22 जनवरी। तेलंगाना में सरकारी स्वामित्व वाली सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) की निविदाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। बीआरएस ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विपक्षी दल को इस मुद्दे पर बहस की चुनौती दी है। एससीसीएल एक कोयला खनन कंपनी है, जिसमें तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त हिस्सेदारी 51:49 के अनुपात में है।

मामले में सीबीआई जांच न कराए जाने की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय एजेंसी से जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार तैयार होती है तो केंद्र सीबीआई जांच पर विचार करेगा।

किशन रेड्डी ने कहा कि हालांकि एससीसीएल तेलंगाना सरकार और केंद्र की संयुक्त स्वामित्व वाली कंपनी है, लेकिन इसके प्रबंधन पर हमेशा राज्य सरकार का नियंत्रण रहा है और केंद्र के पास इसके संचालन में वास्तविक अधिकार नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के परिवार का पिछले बीआरएस शासन के दौरान एससीसीएल में निविदाओं और यहां तक कि छोटे ठेकों तक में प्रभाव रहा।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण एससीसीएल कई समस्याओं में घिर गई और राज्य सरकार पर कंपनी का लगभग 32,000 करोड़ रुपये बकाया हो गया। उनके अनुसार, मौजूदा कांग्रेस सरकार भी उसी राह पर चल रही है और कंपनी में अनियमितताओं को जारी रखे हुए है। किशन रेड्डी ने कहा कि पिछली बीआरएस सरकार ने एससीसीएल के नैनी कोल ब्लॉक के लिए निविदा आमंत्रित की थीं, लेकिन निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उन्हें रद्द कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने भी निविदा आमंत्रित कीं, लेकिन बाद में उन्हें वापस ले लिया। उन्होंने यह भी कहा कि एससीसीएल की एक आपातकालीन बोर्ड बैठक हुई और निविदाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर मीडिया रिपोर्टों के मद्देनजर कोयला मंत्रालय के सचिव जल्द ही तेलंगाना सरकार के मुख्य सचिव को कंपनी के मामलों पर पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सुधारात्मक कदम उठाने के लिए अपने अधिकारियों की एक टीम भेजने पर भी विचार करेगा।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने निविदा मामले की जांच की मांग की। उन्होंने किशन रेड्डी की इस टिप्पणी पर भी निशाना साधा कि यदि कांग्रेस सरकार आगे आकर सीबीआई जांच की मांग करती है तो केंद्र उस पर विचार करेगा। रामाराव ने एक बयान में कहा, “क्या कोई दिनदहाड़े लूट करने वाला कभी खुद के खिलाफ जांच की मांग करते हुए पुलिस थाने जाएगा?”

बीआरएस के हमले का जवाब देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने कहा कि बीआरएस केवल कांग्रेस सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हम बताएंगे कि बीआरएस शासनकाल के दौरान सिंगरेनी की निविदाओं में अधिक राशि बताकर ठेकेदारों को किस तरह फायदा पहुंचाया गया।”

गौड़ ने कहा कि सत्ता में आने के बाद बीते दो वर्षों में कांग्रेस सरकार द्वारा जारी निविदाओं पर बहस के लिए सरकार तैयार है। उन्होंने कहा कि इस बहस में बीआरएस और कांग्रेस सरकारों के बीच ठेका राशि के अंतर को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो सरकार सुधारात्मक कदम उठाएगी। राज्य सरकार ने हाल में एससीसीएल की कुछ निविदाओं में कथित अनियमितताओं की खबरों के बाद उन्हें रद्द करने की घोषणा की थी।

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