एशियाई पैरा खेल : शीतल देवी ने कंपाउंड तीरंदाजी में जीते दो स्वर्ण, स्वाति ने रजत के साथ रचा इतिहास

नागोया, 22 अक्टूबर। भारतीय पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने यहां पांचवें एशियाई पैरा खेलों (Aichi-Nagoya 2026 Asian Para Games) में गुरुवार को कंपाउंड स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। भुजाहीन धनुर्धर शीतल ने तोमन कुमार संग मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण जीता और कुछ देर बाद उऩ्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में बाजी मार ली। वहीं स्वाति चौधरी डब्ल्यू1 स्पर्धा में रजत पदक के बावजूद इतिहास रचने में सफल गईं क्योंकि इस श्रेणी में पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय तीरंदाज हैं।

शीतल ने मौजूदा संस्करण का अपना तीसरा पदक जीता

विश्व चैम्पियन 19 वर्षीय शीतल ने तनावपूर्ण क्षणों में धैर्य बनाए रखते हुए महिला व्यक्तिगत फाइनल में सिंगापुर की अलीम नूर शाहिदा को 142-139 से हराकर खेलों के मौजूदा संस्करण का अपना दूसरा स्वर्ण पदक और कुल मिलाकर तीसरा पदक जीता। इससे पहले उन्होंने महिला कंपाउंड टीम में पायल नाग के साथ रजत पदक जीता था। हांगझू खेलों में भी उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत अपने नाम किये थे।

डब्ल्यू1 स्पर्धा में पदक विजेता पहली भारतीय तीरंदाज बनीं स्वाति

उधर स्वाति महिलाओं के डब्ल्यू1 फाइनल में चीन की सेन मेंगकान के खिलाफ 4-2 की बढत बनाने के बावजूद 4-6 से हार गईं। इस वर्ग में हालांकि भारत का यह पहला पदक है। दिन की आखिरी स्पर्धा में तोमन कुमार पुरुषों के व्यक्तिगत कांस्य प्लेआफ में चीन के झांग यिचेंग से 139-148 से हार गए।

तीरंदाजी में अब तक भारत को 3 स्वर्ण सहित 4 पदक

इस प्रकार देखें तो मौजूदा खेलों में भारतीय तीरंदाज अब तक दो स्वर्ण व दो रजत सहित चार पदक जीत लिए हैं। रिकर्व एलिमिनेशन दौर शुक्रवार को खेला जाएगा। भारत की महिला और पुरुष रिकर्व टीमें फाइनल में पहुंच चुकी हैं जबकि मिश्रित टीम सेमीफाइनल से अभियान का आगाज करेगी। भारत ने 2023 में हांगझू पैरा खेलों में दो स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य पदक जीते थे।

शीतल ने व्यक्तिगत फाइनल में सिंगापुर की अलीम को दी आसान शिकस्त

शीतल ने व्यक्तिगत मुकाबले में जबर्दस्त धैर्य का प्रदर्शन किया। अलीम नूर शाहिदा ने अच्छी शुरुआत की और पहले दो सेट के बाद चार अंकों की बढ़त बना ली। लेकिन-जम्मू कश्मीर की रहने वाली भारतीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी करके अगले दो सेट में लगातार 10-10 अंक हासिल किए। उन्होंने इस बीच तीन एक्स (निशाने के केंद्र के सबसे करीब लगने वाले तीर) भी लगाए। इस तरह से उन्होंने अंतिम सेट से पहले दो अंकों की बढ़त बना ली। शीतल ने अंतिम सेट में नौ-नौ अंकों के साथ कुल 27 अंक हासिल किए जबकि अलीम केवल 26 अंक ही बना सकी।

मिश्रित टीम स्पर्धा में शीतल ने तोमन संग बाजी मारी

इसके पहले मिश्रित टीम में शीतल व तोमन ने फाइनल में इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली व केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया। क्वालीफाइंग राउंड में विश्व रिकार्ड बनाने वाली शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शुरू से लेकर आखिर तक अपनी बढ़त बनाए रखी।

भारतीय टीम ने पहले सेट में 38-37 से बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उसने दूसरे सेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया और 77-73 के अंतर से अपनी बढ़त चार अंक की कर दी। इस दौरान केवल एक अंक गंवाया। इंडोनेशियाई टीम ने तीसरे सेट में एक अंक से जीत हासिल की, लेकिन भारतीय टीम ने तीन अंकों की बढ़त बनाए रखी। अंतिम सेट में दोनों टीमों ने 38 अंक बनाए, जो भारत को तीन अंकों की जीत के साथ स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त थे।

छत्तीसगढ़ के बलोद जिले के नवागांव के रहने वाले 31 वर्षीय तोमन सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। उन्होंने फरवरी, 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले में माओवादियों के खिलाफ संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान एक आईईडी विस्फोट में अपना बायां पैर गंवा दिया था। इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका पैर काटना पड़ा था।

चीनी तीरंदाज के खिलाफ स्वाति बढ़त कायम नहीं रख सकीं

इससे पहले स्वाति को डब्ल्यू1 श्रेणी में महिला व्यक्तिगत फाइनल में चीन की सेन मेंगकन के हाथों 25-17, 21-22, 22-21, 20-30, 21-28 से हार का सामना करना पड़ा। पिछले महीने अहमदाबाद में विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में कांस्य पदक जीतने वाली स्वाति ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 25-17 से जीत लिया।

चीन की खिलाड़ी ने दूसरा सेट जीता लेकिन स्वाति ने तीसरा सेट जीत कर वापसी की। चीन की खिलाड़ी ने चौथे सेट में तीन परफेक्ट 10 के साथ 30 का स्कोर बनाकर सेट 30-20 से जीत लिया और मैच को 4-4 से बराबर कर दिया। सेन ने निर्णायक सेट में अपना धैर्य बनाए रखा तथा स्वाति के 21 अंकों के मुकाबले 28 अंक बनाकर एशियाई पैरा खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता।

मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति को भले ही स्वर्ण पदक नहीं मिला, लेकिन वह इस वर्ग में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई। डब्ल्यू1 श्रेणी में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं। इस वर्ग में टेट्राप्लेजिया जैसी स्थितियों से ग्रस्त एथलीट शामिल हैं, जिनमें मांसपेशियों की शक्ति और अंगों के कार्य में समान रूप से कमी होती है।

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