अयोध्या में RSS का विजयादशमी उत्सव, शस्त्र पूजा के बाद राम जन्मभूमि तक निकला पथ संचलन

अयोध्या, 20 अक्टूबर। रामनगरी अयोध्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने विजयादशमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया। रामलला नगर में आयोजित कार्यक्रम में शस्त्र पूजा, ध्वजारोहण और स्वयंसेवकों का पथ संचलन प्रमुख आकर्षण रहे। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन, नगर संघचालक जयरामदास सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक मौजूद रहे। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन की परंपराओं और राष्ट्रसेवा के संकल्प पर जोर दिया गया।

शस्त्र पूजा और ध्वजारोहण से हुई शुरुआत

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि विजयादशमी संघ के प्रमुख उत्सवों में से एक है। इस वर्ष संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में स्वयंसेवक एकत्र हुए और पथ संचलन का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत शस्त्र पूजा और ध्वजारोहण से हुई। इसके बाद महानगर सेवा प्रमुख बालेंद्र का उद्बोधन हुआ और फिर स्वयंसेवक पथ संचलन के लिए रवाना हुए।

तुलसी उद्यान से राम जन्मभूमि तक निकला पथ संचलन

नगर संघचालक जयरामदास ने बताया कि रामलला नगर में सबसे पहले शाखा लगाई गई। इसके बाद ध्वज प्रणाम, स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण, प्रार्थना और बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने पथ संचलन के मार्ग की जानकारी देते हुए बताया कि यह तुलसी उद्यान से शुरू होकर लता चौक और हनुमानगढ़ी होते हुए श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य द्वार तक पहुंचा। इसके बाद संचलन हनुमानगढ़ी रोड से वापस तुलसी उद्यान की ओर लौटा।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजा की परंपरा

जयरामदास ने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा रही है। उन्होंने भगवान श्रीराम द्वारा रावण के अंत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन हर वर्ष भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के यश, कीर्ति और प्रतिष्ठा को स्मरण करने के लिए किए जाते हैं। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवक सफेद शर्ट, खाकी पैंट और काली टोपी की पारंपरिक वेशभूषा में लाठी लेकर अनुशासित कतारों में चलते नजर आए। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी मौजूद रहा।

जयपुर में भी RSS ने निकाला रूट मार्च

विजयादशमी के अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से रूट मार्च आयोजित किया गया। इसमें स्वयंसेवकों ने पारंपरिक जुलूस में हिस्सा लिया। अयोध्या और जयपुर में हुए आयोजनों के दौरान संघ की विजयादशमी परंपरा और शताब्दी वर्ष का विशेष महत्व देखने को मिला।

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