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राष्ट्रपति ट्रंप ने मार्क रुट्टे से व्हाइट हाउस में मुलाकात की, नाटो की आलोचना, जानें क्या है पूरा मामला

राष्ट्रपति ट्रंप ने मार्क रुट्टे से व्हाइट हाउस में मुलाकात की, नाटो की आलोचना, जानें क्या है पूरा मामला

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वाशिंगटन, 9 अप्रैल। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ एक निजी बैठक के बाद, ईरान युद्ध में अमेरिका का समर्थन न करने के लिए नाटो की फिर से आलोचना की। यह जानकारी बीबीसी ने गुरुवार को दी। बैठक के बाद ट्रुथ सोशल पर साझा की गई एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जब हमें नाटो की जरूरत थी तब वे मौजूद नहीं थे और अगर हमें उनकी फिर से जरूरत पड़ी तो वे मौजूद नहीं होंगे।” इस बीच, स्पष्ट मतभेदों के बावजूद रुट्टे ने सीएनएन को ट्रंप के साथ अपनी मुलाकात को बहुत स्पष्ट और बहुत खुला करार दिया।

बुधवार को होने वाली वार्ता से पहले, ट्रंप ने नाटो से बाहर निकलने के विचार पर गौर किया था क्योंकि कई नाटो देशों ने वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद करने के उनके आह्वान का विरोध किया था। हालांकि व्हाइट हाउस ने वार्ता के विवरण का खुलासा नहीं किया। नाटो महासचिव बुधवार को दो घंटे से अधिक समय तक व्हाइट हाउस में रहे, हालांकि ट्रंप के साथ उनकी बैठक कितने समय तक चली यह ज्ञात नहीं है। इस बैठक का उद्देश्य ट्रंप को यह समझाना और राजी करना था कि नाटो गठबंधन में बने रहना उनके और अमेरिका दोनों के हित में है।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि राष्ट्रपति ट्रंप को अभी भी इस गठबंधन और इसके सदस्य देशों के बारे में गहरी आशंकाएं हैं क्योंकि उनका मानना है कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से पहले और उसके दौरान इन देशों ने अमेरिका की पर्याप्त मदद नहीं की। हाल के हफ्तों में ट्रंप ने 32 सदस्यीय गठबंधन से हटने की लगातार धमकी दी है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में नाटो की भूमिका के बारे में पूछे गए एक सवाल पर, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने राष्ट्रपति के एक प्रत्यक्ष उद्धरण का हवाला देते हुए कहा कि नाटो की परीक्षा ली गई और वे असफल रहे।

उन्होने कहा कि नाटो देशों ने अमेरिकी जनता से मुंह मोड़ लिया है जो उनके देशों की रक्षा के लिए धन देते हैं और ट्रंप नाटो प्रमुख के साथ बहुत ही स्पष्ट और बेबाक बातचीत करेंगे। इस बीच नाटो महासचिव ने सीएनएन को बताया कि उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अधिकांश यूरोपीय देशों ने सैन्य अड्डे स्थापित करने, रसद व्यवस्था और हवाई उड़ानों में सहायता प्रदान की है”। हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या यह बात और महासचिव के ट्रंप के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए पर्याप्त साबित होंगे या नहीं।

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