पश्चिम बंगाल : झारग्राम में चुनावी रैली के बाद झालमुड़ी के स्टाल पर रुके पीएम मोदी, पारंपरिक व्यंजन का लिया स्वाद
कोलकाता, 19 अप्रैल। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तहते पहले चरण की वोटिंग (23 अप्रैल) में अब सिर्फ तीन दिन शेष हैं और सभी राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राज्य में चार चुनावी रैलिंया कीं।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी की झारग्राम में चुनावी रैली के बाद एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब वह जनसभा को संबोधित करने के बाद अचानक रास्ते में एक झालमुड़ी के स्टॉल पर रुक गए और बंगाल के पारंपरिक व्यंजन का स्वाद भी लिया।
In between four rallies across West Bengal on a packed Sunday, had some delicious Jhalmuri in Jhargram. pic.twitter.com/NEKLm5R0mE
— Narendra Modi (@narendramodi) April 19, 2026
सोशल मीडिया पर शेयर की फोटो
पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर झालमुड़ी की दुकान पर रुकने की तस्वीरें और वीडियो शेयर किया। सोशल मीडिया पर पीएम का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। अचानक पीएम का काफिला रुकने से वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। शेयर की गई पोस्ट में पीएम ने लिखा, ‘रविवार को पश्चिम बंगाल में चार पब्लिक मीटिंग के बीच झारग्राम में कुछ स्वादिष्ट मसालेदार झालमुड़ी का आनंद लेते हुए।’ साथ ही पीएम ने स्टॉल लगाने वाले दुकानदार को 10 रुपये भी दिए।
Jhalmuri break in Jhargram! pic.twitter.com/LJNjEojAW4
— Narendra Modi (@narendramodi) April 19, 2026
दरअसल, झारग्राम में सभा खत्म करने के बाद जब पीएम मोदी हैलिपेड की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने अचानक गाड़ी रुकवाई और सड़क किनारे लगे झालमुड़ी के स्टॉल पर चले गए। वहां उन्होंने ताजा झालमुड़ी खाई और आसपास खड़े बच्चों को भी दी। इस दौरान उन्होंने पास की महिलाओं से भी बात की और कुछ देर वहीं रुके रहे। झालमुड़ी का ठेला बिहार के गया जिले के रहने वाले विक्रम साह का था, जो पिछले करीब 12 वर्षों से झारग्राम में दुकान चला रहे हैं।
टीएमसी पर ‘आदिवासी विरोधी’ तथा ‘महिला विरोधी’ होने के आरोप लगाए
पीएम मोदी ने झारग्राम के आदिवासी बहुल क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा और उस पर ‘आदिवासी विरोधी’ तथा ‘महिला विरोधी’ होने के आरोप लगाए। विजय संकल्प सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अवैध जमीन कब्जे जैसे अहम स्थानीय मुद्दों को अनदेखा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में आदिवासी समुदाय और महिलाओं की आवाज को लगातार दबाया और नजरअंदाज किया जाता रहा है।
