RBI का फैसला : केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026 के लिए रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड देने की घोषणा
मुंबई, 22 मई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड देने की घोषणा की, जिससे सरकार को पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से उत्पन्न चुनौतियों से निबटने में मदद मिलेगी। आरबीआई की बैलेंस शीट का साइज वित्त वर्ष 26 तक सालाना आधार पर 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
बैंक की सकल आय में पिछले वर्ष की तुलना में 26.42 प्रतिशत की वृद्धि
यह निर्णय देश की आर्थिक राजधानी में भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में लिया गया। बोर्ड ने वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य की समीक्षा की, जिसमें भविष्य के जोखिमों का भी विश्लेषण किया गया। इस बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिजर्व बैंक के वार्षिक खातों पर विचार-विमर्श किया गया। बैंक की सकल आय में पिछले वर्ष की तुलना में 26.42 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि रिस्क प्रोविजन से पहले व्यय में 27.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
आरबीआई के अनुसार, रिस्क प्रोविजन और वैधानिक निधियों में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय वित्त वर्ष 2025-26 में 3,95,972.10 करोड़ रुपये रही जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 3,13,455.77 करोड़ रुपये थी। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचा (ईसीएफ) बैलेंस शीट के आकार के 4.5 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत के बीच कंटिजेंट रिस्क बफर (सीआरबी) बनाए रखने की सुविधा प्रदान करता है।’
सीआरबी को बैलेंस शीट के 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का भी निर्णय
वर्तमान व्यापक आर्थिक कारकों, बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और उचित जोखिम बफर बनाए रखने को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सीआरबी सीआरबी में 1,09,379.64 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का निर्णय लिया, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 44,861.70 करोड़ रुपये थी। केंद्रीय बोर्ड ने सीआरबी को आरबीआई की बैलेंस शीट के 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का भी निर्णय लिया।
केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2,86,588.46 करोड़ रुपये का सरप्लस हस्तांतरित करने को भी मंजूरी दी। बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र को 2026-27 में भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से डिविडेंड और सरप्लस के रूप में 3.16 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद है।
