पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने संसद में दी जानकारी- 5 दिनों में एलपीजी उत्पादन 28% बढ़ा
नई दिल्ली, 12 मार्च। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में जानकारी दी कि पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है। यह अफवाहें फैलाने या झूठे आख्यान गढ़ने का समय नहीं है।
सरकार की प्राथमिकता – वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और सिलेंडर की डेलिवरी का समय पहले की तरह ही बना हुआ है।
सिलेंडर डेलिवरी समय पहले की भांति ढाई दिन ही
हरदीप पुरी ने संसद को बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डेलिवरी तक का औसत समय अब भी 2.5 दिन है, जो संकट से पहले भी इतना ही था। इसके अलावा, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों से ऐसी जानकारी मिली है कि डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है।
रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। कई मामलों में, वे 100% से भी अधिक क्षमता पर चल रही हैं। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एटीएफ या ईंधन तेल की कोई कमी नहीं है। पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन, टरबाइन ईंधन, केरोसिन और ईंधन तेल की उपलब्धता पूरी तरह से सुनिश्चित… pic.twitter.com/jKcJtXNVVl
— SansadTV (@sansad_tv) March 12, 2026
सिलेंडर आपूर्ति में हेराफेरी पर रोक के लिए DAC प्रणाली का विस्तार
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सरकार डेलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सिलेंडर की डेलिवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा, जिससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा। मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है।
कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना
उन्होंने बताया कि तेल मार्केटिंग कम्पनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था के साथ जोड़ने पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना। कमर्शियल एलपीजी पूरी तरह बाजार आधारित कीमत पर बिना सब्सिडी के बेची जाती है और इसके लिए कोई पंजीकरण या बुकिंग प्रणाली नहीं होती।
The world has not faced a moment like this in modern energy history…India's crude supply position is secure, and the volume secured exceeds what the Hormuz would have delivered. Before the crisis, approximately 45% of India's crude imports transited through… pic.twitter.com/vQSTHEWdZ6
— SansadTV (@sansad_tv) March 12, 2026
हरदीप पुरी ने कहा कि यदि कमर्शियल एलपीजी की बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती तो काउंटर से खरीदे गए सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को नुकसान होता। इसलिए सरकार ने स्पष्ट प्राथमिकता और पारदर्शी आवंटन प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति नौ मार्च को बनाई गई थी। इस समिति ने देशभर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं।
वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा
समिति ने विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों के आधार पर कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया है। इसके तहत एक बड़े फैसले में आज से तेल कम्पनियां औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो। उन्होंने कहा कि एलपीजी और गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हालिया 60 रुपये के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपये होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के अनुसार, प्रति सिलेंडर 134 रुपये की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपये खुद वहन किए। इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है।
तेल कम्पनियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 30,000 करोड़ का मुआवजा
पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपये, श्रीलंका में 1,242 रुपये और नेपाल में 1,208 रुपये के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल मार्केटिंग कम्पनियों को 2024-25 में हुए करीब 40,000 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है।
