लखनऊ, 5 सितम्बर। यूपी के सहारनपुर कमिश्नरेट परिसर में 150 वर्ष पुरानी बताई जा रही मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन से सियासी पारा चढ़ गया है और विपक्षी दलों के नेताओं ने कोर्ट के आदेश के बाद अवैध मस्जिद को ध्वस्त करने की यूपी सरकार की कारवाई पर आक्रोश व्यक्त किया है।
‘इस तरह मस्जिदों को ध्वस्त करने का अभियान ठीक नहीं‘
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये कहा कि सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिए इस पर तुरंत रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय जरूर करने चाहिए। अपने X हैंडल पर मायावती ने लिखा – ‘जिला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आए दिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है, वह ठीक नहीं है। वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है। इस्लाम मजहब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में जरूरी है।’
1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये।
2.…— Mayawati (@Mayawati) September 5, 2026
‘सरकार ही नहीं, कोर्ट भी ध्यान दे‘
बसपा प्रमुख ने आगे लिखा – ‘बिना नियम-कानून का समुचित अनुपालन किए हुए किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सजा देकर बेघर बार कर देने की काररवाईयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बीएसपी सरकार की तरह के कानून द्वारा कानून का राज का व्यवहार जरूरी है। अतः केवल सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा। लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी जरूर बना कर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।’
गौरतलब है कि सहारनपुर के कलेक्ट्रेट में स्थित मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी थी। डेढ़ वर्ष तक चले मुकदमे के बाद जिला कोर्ट ने इसे अवैध करार दिया था। इसके बाद शनिवार तड़के पुलिस और जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
इमरान मसूद बोले- सुप्रीम कोर्ट ले जाऊंगा मामला
इस काररवाई से भड़के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रात में ही लाइव आकर इस मामले को हाई कोर्ट और सु्प्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से शांति बनाए रखने की भी अपील की। मसूद ने कहा कि तमाम दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया। उनके अनुसार यह सिर्फ मस्जिद का मामला नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों का सवाल है।
मस्जिद की मिल्कियत को लेकर किया दावा
इमरान मसूद ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद 1911 से पहले की है और आज भी इसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद की मिल्कियत वहीद खान और याकूब खान के नाम बताई गई है। उनका आरोप है कि प्रशासन को तमाम जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद काररवाई की गई।
VIDEO | Uttar Pradesh: On the demolition of a mosque in the Collectorate complex in Saharanpur following a district court order, Congress leader Imran Masood says, "This order as well as the demolition are both unconstitutional. The documents were completely ignored… We will… pic.twitter.com/otfA3hG5SG
— Press Trust of India (@PTI_News) September 5, 2026
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर उठाए सवाल
मसूद ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश का भी जिक्र किया। उनके अनुसार आदेश में 30 दिनों का समय दिया गया था, लेकिन 24 तारीख को इस मामले में स्टे हो गया था और करीब 22 दिन की अवधि अब भी बाकी थी। इसके बावजूद मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।
वक्फ को पार्टी नहीं बनाने का आरोप
कांग्रेस सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि काररवाई के दौरान वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि वक्फ को मामले में पार्टी नहीं बनाया गया। उन्होंने वक्फ-ए-यूजर समेत अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा किया कि इन पहलुओं की भी अनदेखी की गई।
‘खसरा मौजूदा स्थिति बताता है‘
इमरान मसूद जमीन के खसरा रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि खसरा केवल जमीन की मौजूदा स्थिति बताता है और उसके आधार पर मालिकाना हक पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी आधार पर जमीन को लेकर प्रशासनिक निष्कर्ष निकाला गया।
दूसरों की आस्था का सम्मान करने वाला ही सच्चा सनातनी – अखिलेश यादव
उधर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते, वे सच्चे सनातनी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि दूसरों की आस्था से खिलवाड़ करना सनातन धर्म की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सच्चा हिन्दू कभी दूसरों का अपमान नहीं करता। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म हमें पूरी धरती और समाज को एक परिवार मानने की सीख देता है।
औवैसी बोले –1911 के दस्तावेज के बावजूद क्यों चला बुलडोजर?
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरकार की काररवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब मुसलमानों के लिए मजहबी आजादी का संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को आज सुबह 5 बजे ढहा दिया गया।
क्या मुसलमानों के लिए अब मज़हबी आज़ादी का संवैधानिक हक़ भी नहीं बचा है? हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमज़ोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोज़र क्यों चलाया जाता है?
मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज़ अदालत में…
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) September 5, 2026
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उन दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की गई कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। एक सदी से अधिक समय से वहां लगातार नमाज होती रही है। यह कोई हाल में बनाई गई इमारत नहीं थी, बल्कि लंबे समय से इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है।
वक्फ बाय यूजर और लिमिटेशन एक्ट का हवाला
ओवैसी ने अपने बयान में वक्फ बाय यूजर का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय से किसी स्थान के इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होने का भी कानूनी महत्व है। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का हवाला देते हुए सरकार की ओर से जमीन के दावे पर सवाल उठाया। जब किसी जमीन पर एक सदी से अधिक समय से खुले तौर पर और लगातार कब्जा रहा हो तो सरकार अचानक उसे नजरअंदाज कर यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। इतने लंबे समय की काबिजी को देखते हुए प्रतिकूल कब्जे का सवाल भी उठता है।
‘मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में‘
ओवैसी ने कहा कि वहां मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया। कुछ लोगों को मस्जिद दिखाई देने पर तकलीफ हो सकती है, लेकिन यह उनका मसला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी खुन्नस मिटाने के लिए किसी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता। धार्मिक आजादी किसी की रहम-ओ-करम पर निर्भर नहीं है।


