NEET UG 2026 टॉपर आर्यन गुप्ता ने बताया सफलता का राज, 715 अंकों के साथ लिखी सफलता की नई इबारत

लुधियाना, 17 जुलाई। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में पंजाब के लुधियाना से आर्यन गुप्ता ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। आर्यन ने कुल 720 में से 715 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे पंजाब में खुशी की लहर दौड़ गई है।

डॉक्टरों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं आर्यन

आर्यन गुप्ता डॉक्टरों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके माता-पिता, नाना-नानी, मामा-मामी और बुआ-फूफा सभी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। बचपन से ही घर में डॉक्टर बनने का माहौल देखते हुए आर्यन के मन में भी यही सपना पुख्ता होता गया।

लगातार मेहनत, शिक्षकों का मार्गदर्शन और परिवार का अटूट सहयोग

आर्यन ने अपनी सफलता का श्रेय लगातार मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के अटूट सहयोग को दिया। उन्होंने कहा, ‘नीट जैसी परीक्षा में सफलता के लिए लगातार प्रयास और धैर्य सबसे जरूरी है। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को गहराई से समझना और घर आकर नियमित रिवीजन करना मेरी रणनीति रही।’

दोबारा परीक्षा बनी चुनौती, लेकिन मजबूती से लिया अवसर

दरअसल, परीक्षा प्रक्रिया में आए बदलाव और दोबारा परीक्षा का एलान आर्यन के लिए भी बड़ी चुनौती था। पहली परीक्षा में उन्हें 696 अंक मिले थे। दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद किताबें बंद करने के बावजूद उन्होंने पूरी तैयारी दोहराई और इस बार 715 अंक हासिल कर दिए। उन्होंने बताया कि दूसरी परीक्षा पहले से ज्यादा कठिन थी, लेकिन मेहनत पर उनका भरोसा अटूट था। उन्होंने ईश्वर की कृपा और किस्मत को भी सफलता का अहम हिस्सा बताया।

बड़े भाई आदित्य को बताया अपना रोल मॉडल

आर्यन ने अपनी सफलता में सबसे खास भूमिका अपने बड़े भाई आदित्य गुप्ता की बताई। उन्होंने कहा, ‘पिछले दो वर्षों में मेरे भाई ने मुझे सही दिशा दिखाई, परीक्षा की रणनीति समझाई और हर कदम पर प्रेरणा दी। वह मेरे रोल मॉडल रहे हैं।’

परिवार ने दिया खुला माहौल, नहीं डाला कोई दबाव

आर्यन की मां रेनू गुप्ता ने बताया कि परिवार में शिक्षा और मेहनत को हमेशा सर्वोच्च महत्व दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमारा अस्पताल और घर एक ही जगह है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना आसान रहा। बच्चा खुद मेहनत करे तो माता-पिता का काम सिर्फ सही माहौल और समर्थन देना होता है।’

वहीं पिता सचिन गुप्ता ने कहा कि बच्चों पर कभी पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया गया। आर्यन गणित में भी अच्छे था और उसके पास अन्य विकल्प भी थे, लेकिन उसने खुद डॉक्टर बनने का फैसला किया। परिवार ने सिर्फ दिशा और सहयोग दिया। आर्यन पढ़ाई के साथ सामान्य जीवन भी जीता था। मसलन, दोस्तों से मिलना, खेलना और परिवार के साथ समय बिताना।’ खैर, आर्यन को सफलता मिलने के बाद पूरा परिवार अब धार्मिक यात्रा पर जाने की योजना बना रहा है।

RELATED ARTICLES

Most Popular