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फ्रेंच ओपन : मीरा एंड्रीवा बनीं रोलां गैरो की नई मलिका, इतिहास नहीं रच सकीं क्वालीफायर माया च्वालिंस्का

फ्रेंच ओपन : मीरा एंड्रीवा बनीं रोलां गैरो की नई मलिका, इतिहास नहीं रच सकीं क्वालीफायर माया च्वालिंस्का

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पेरिस, 6 जून। रोलां गैरों की लाल बजरीयुक्त सतह पर शनिवार की शाम नई मलिका का ताजपोशी हो गई, जब रूस की 19 वर्षीय सनसनी मीरा एंड्रीवा ने वर्ष के दूसरे ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट यानी फ्रेंच ओपन के एकतरफा फाइनल में पोलिश क्वालीफायर माया च्वालिंस्का को 6-3, 6-2 की आसान शिकस्त दे दी।

फिलिप चेट्रिएं सेंटर कोर्ट पर करिअर का पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल खेलने उतरीं दो खिलाड़ियों की इस टक्कर में आठवीं सीड एंड्रीवा को सिर्फ 82 मिनट खर्च करने पड़े और उन्होंने डब्ल्यूटीए टूर में 114वें नंबर की 24 वर्षीय च्वालिंस्का को परास्त कर सिर्फ 19 वर्ष की आयु में पहला मेजर खिताब जीतकर टेनिस जगत में नया अध्याय जोड़ दिया।

सेलेस के बाद सबसे कम उम्र फ्रेंच ओपन चैम्पियन बनीं एंड्रीवा

एंड्रीवा रोलां गैरो में 1992 के बाद यानी 34 वर्षों में सबसे कम उम्र की महिला चैम्पियन बनी हैं। यह रिकॉर्ड अमेरिकी मोनिका सेलेस के नाम है, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु में यहां चैम्पियन का श्रेय अर्जित किया था। दिलचस्प तो यह है कि फ्रेंच ओपन में लगातार दूसरे वर्ष महिला वर्ग में नई चैम्पियन का अभ्युदय हुआ। पिछले वर्ष अमेरिकी अश्वेत सुंदरी कोको गॉफ ने टॉप सीड बेलारूसी स्टार एरिना सबालेंका को चौंकाने के साथ यह उपलब्धि हासिल की थी।

मीरा ने 2-3 से पिछड़ने के बाद लगातार 10 गेम जीते

तेज हवाओं के बीच शुरुआती पांच गेमों में दोनों खिलाड़ियों के बीच तनावपूर्ण रैलियां हुईं क्योंकि दोनों ही ग्रैंड स्लैम फाइनल के अपरिचित माहौल में खुद को ढालने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन एक बार जब एंड्रीवा ने लय पकड़ ली, तो उनकी प्रतिभा दिखने लगी।

एंड्रीवा ने पहले सेट में 2-3 से पिछड़ने के बाद लगातार 10 गेम जीतकर मुकाबले को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया। मैच प्वॉइंट पर बैकहैंड क्रॉस कोर्ट विनर के साथ वह भावुक होकर कोर्ट पर ही घुटनों के बल बैठ गईं और जीत का जश्न मनाया।

असल जिंदगी में खिताब जीतने का एहसास सपनों से कहीं बेहतर : एंड्रीवा

पेरिस में अपने पहले ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल में पहुंचने के दो वर्ष उपाधि जीतने वालीं एंड्रीवा ने मेरी पियर्स के हाथों ट्रॉफी ग्रहण करने के बाद कहा, ‘सच कहूं तो मैंने पहले भी कई बार कल्पनाएं की हैं। सिर्फ इस टूर्नामेंट के बारे में ही नहीं, बल्कि मैंने सपने देखे हैं, मैंने इस बारे में बहुत सोचा है कि यह कैसे होगा, क्या यह होगा, कब होगा और कहां होगा।’

एंड्रीवा ने कहा, ‘मैं कहूंगी कि असल जिंदगी में यह एहसास सपनों से कहीं बेहतर होता है। इस ट्रॉफी को देखकर और यह महसूस करके कितना अच्छा लगता है कि यह सचमुच सच है, और मैं खुद को ग्रैंड स्लैम चैम्पियन कह सकती हूं।’

मैं इन तीन हफ्तों को कभी नहीं भूलूंगी – च्वालिंस्का

दूसरी ओर क्वालीफायर के तीन सहित फाइनल तक 10 मैचों का सफर तय करने वालीं च्वालिंस्का इतिहास रचने से चूक गईं। वह ओपन युग (1968) की शुरुआत से रोलां गैरो में खिताब जीतने वाली पहली क्वालीफायर चैम्पियन बनने की कोशिश में थीं।

फिलहाल इस शानदार प्रदर्शन के बाद च्वालिंस्का सोमवार को विश्व रैंकिंग में 114वें स्थान से 21वें स्थान पर पहुंच जाएंगी और परिणाम के बाद उन्होंने दार्शनिक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा, ‘मैं इन तीन हफ्तों को कभी नहीं भूलूंगी। मुझे ऐसा लगा जैसे आज मेरे पास उसके (एंड्रीवा) खिलाफ कोई हथियार नहीं था। उसने हवा का सामना मुझसे कहीं बेहतर तरीके से किया।’

ग्रैनोलर्स व जेबालोस ने बचाया पुरुष एकल खिताब

इस बीच महिला एकल फाइनल से पहले सेंटर कोर्ट पर बंद छत के नीचे खेले गए मैच में सर्वोच्च वरीय स्पेन के मार्सेल ग्रैनोलर्स व उनके अर्जेंटीनी जोड़ीदार होरासियो जेबालोस ने दूसरी सीड फिनलैंड के हैरी हेलियोवारा व ब्रिटेन के हेनरी पैटन पर 6-4, 6-2 की जीत से पुरुष युगल खिताब का सफल बचाव किया।

ग्रैनोलर्स व जेबालोस ने बिना कोई सेट गंवाए अपना तीसरा मेजर खिताब जीता। पिछले पांच ग्रैंड स्लैम में यह उनकी तीसरी खिताबी जीत थी। जेबालोस ने दर्शकों से कहा, ‘मैं 41 वर्ष का हूं और यह मेरे करिअर के सबसे बेहतरीन पलों में से एक है।’

पुरुष एकल फाइनल : ज्वेरेव करिअर के पहले मेजर खिताब की देहरी पर

महिलाओं की भांति पुरुष एकल का रोमांच भी अपने चरम पर है, जहां दूसरी सीड जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव करिअर के पहले ग्रैंड स्लैम खिताब से एक कदम दूर हैं, जहां रविवार को उनकी मुलाकात 10वें वरीय इतालवी प्लेवियो कोबोली से होगी। ज्वेरेव इससे पहले 2020 यूएस ओपन, 2024 फ्रेंच ओपन और 2025 ऑस्ट्रेलियाई ओपन के फाइनल में पहुंच चुके हैं, लेकिन अब तक ट्रॉफी नहीं उठा सके हैं।

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