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रक्षा मंत्रालय ने बनाया रिकॉर्ड : वित्त वर्ष 25-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा

रक्षा मंत्रालय ने बनाया रिकॉर्ड : वित्त वर्ष 25-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा

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नई दिल्ली, 17 जून। भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश की प्रगति को दर्शाती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह अब तक का सबसे अधिक वार्षिक रक्षा उत्पादन है।

रक्षा उत्पादन में 15.6% की वृद्धि, एक दशक में चार गुना बढ़ोतरी

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 1.54 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 15.6% अधिक है। दीर्घकालिक आधार पर देखें तो वित्त वर्ष 2020-21 के 84,643 करोड़ रुपये की तुलना में उत्पादन में 110% की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, वित्त वर्ष 2013-14 में रक्षा उत्पादन 43,746 करोड़ रुपये था। इस प्रकार पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया है, जो घरेलू रक्षा औद्योगिक क्षमता में निरंतर निवेश का परिणाम माना जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया श्रेय

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को इसका प्रमुख कारण बताया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन के आंकड़े स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को मजबूत बनाने और सशक्त रक्षा औद्योगिक आधार तैयार करने के सरकार के प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योगों और अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उनके अनुसार, उत्पादन में लगातार वृद्धि भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।

सार्वजनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक

वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का योगदान कुल रक्षा उत्पादन का लगभग 76% रहा। इन संस्थाओं ने रक्षा उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाना जारी रखा। हालांकि, निजी क्षेत्र की भागीदारी भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वित्त वर्ष 2024-25 में 22% हिस्सेदारी के मुकाबले वित्त वर्ष 26 में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 24% हो गई। निजी कंपनियों ने लगभग 42,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जो भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अब तक का सर्वाधिक योगदान है।

रक्षा निर्यात ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

घरेलू रक्षा विनिर्माण में तेजी का असर रक्षा निर्यात पर भी दिखाई दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह भारतीय रक्षा उपकरणों और प्लेटफॉर्मों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि रिकॉर्ड उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात, दोनों उपलब्धियां भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसकी मजबूत होती उपस्थिति का संकेत हैं।

भविष्य में और तेज हो सकती है विकास की रफ्तार

सरकार ने हाल के वर्षों में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में सुधार, घरेलू निर्माताओं के लिए प्रोत्साहन और रक्षा निर्यात बढ़ाने संबंधी पहल शामिल हैं। बढ़ते निवेश, उत्पादन क्षमता के विस्तार और भारतीय रक्षा उत्पादों की वैश्विक मांग में वृद्धि को देखते हुए नीति-निर्माताओं को उम्मीद है कि देश का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र आने वाले वर्षों में भी मजबूत विकास दर बनाए रखेगा।

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