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महाराष्ट्र सरकार का फरमान : मराठी नहीं पढ़ाने वाले स्कूलों पर होगी काररवाई, वसूला जाएगा जुर्माना

Revoi Editor
Last updated: April 18, 2026 5:37 pm
Revoi Editor
Published: April 18, 2026
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मुंबई, 18 अप्रैल। महाराष्ट्र के स्कूलों में कक्षा एक से 10वीं तक मराठी भाषा अनिवार्य की गई है. लेकिन जो स्कूल इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला सरकार ने किया है। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक विस्तृत प्रक्रिया तय की है और इस संबंध में एक सरकारी निर्णय (जीआर) जारी किया है। सरकारी प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से ही राज्य भर के स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मराठी एक अनिवार्य विषय है।

यह नियम ‘महाराष्ट्र अनिवार्य शिक्षण और मराठी भाषा अधिगम अधिनियम, 2020’ के लागू होने के साथ अनिवार्य किया गया था। अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे पहला नोटिस दिया जाएगा और 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देना अनिवार्य होगा। अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो संबंधित स्कूल प्रबंधन पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही अगले शैक्षणिक वर्ष से मराठी विषय को अनिवार्य रूप से शुरू करने के आदेश भी जारी किए जाएंगे।

इसके अलावा संबंधित स्कूल को इस निर्णय के खिलाफ 30 दिनों के भीतर अपील करने का अवसर दिया जाएगा। अगर अपील के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में अंतिम निर्णय स्कूल शिक्षा आयुक्त स्तर पर सुनवाई करने के बाद तीन महीने के भीतर लिया जाएगा। विभाग ने सूचित किया है कि यह निर्णय राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा के प्रभावी शिक्षण को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने टैक्सी, ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य की है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा था कि ये सारी बातें गरीब लोगों को तकलीफ देने की हैं। उन्होंने कहा था कि ये बातें अभी क्यों की जा रही हैं? उन्होंने आरोप लगाया था यह रिक्शावालों और टैक्सीवालों से पैसा वसूलने का धंधा है।

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