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मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी : उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन को मिटाओ’ वाली टिप्पणी नरसंहार का संकेत देती है

मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी : उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन को मिटाओ’ वाली टिप्पणी नरसंहार का संकेत देती है

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चेन्नई, 21 जनवरी। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन का सनातन धर्म को ‘खत्म करने’ का बयान नरसंहार जैसा है। कोर्ट ने यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पार्टी के IT सेल के हेड अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद करते हुए की।

भाजपा IT सेल प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद

कानूनी समाचार वेबसाइट ‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस एस श्रीमथी ने तमिलनाडु पुलिस द्वारा अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज की गई FIR को रद कर दिया। मालवीय के खिलाफ X पर स्टालिन के भाषण का वीडियो शेयर करने और यह सवाल उठाने का आरोप था कि क्या यह बयान भारत की 80 प्रतिशत आबादी के, जो सनातन धर्म को मानती है, नरसंहार की बात है।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने कहा, “यदि सनातन धर्म को मानने वाले लोगों का कोई समूह नहीं होना चाहिए, तो इसके लिए सही शब्द ‘नरसंहार’ है। अगर सनातन धर्म एक धर्म है तो यह ‘धर्मसंहार’ है। इसका मतलब यह भी है कि किसी भी तरीके या अलग-अलग तरीकों से लोगों को खत्म करना, जिसमें पर्यावरण विनाश, तथ्य विनाश, संस्कृति विनाश (सांस्कृतिक नरसंहार) जैसे अलग-अलग हमले शामिल हैं। इसलिए, तमिल वाक्यांश ‘सनातन ओझिप्पु’ का साफ मतलब नरसंहार या संस्कृति विनाश होगा।”

उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और COVID-19 जैसी बीमारियों से की थी

यह मामला तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स आर्टिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ नाम के एक कॉन्फ्रेंस में दो सितम्बर, 2023 को स्टालिन द्वारा दिए गए भाषण से जुड़ा है। अपने भाषण में, उप मुख्यमंत्री स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और COVID-19 जैसी बीमारियों से करते हुए कहा था कि कुछ चीजों का सिर्फ विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें खत्म किया जाना चाहिए। उदयनिधि ने तमिल में दिए गए भाषण में कहा, ‘सनातन धर्म का विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए।’ उन्होंने तमिल वाक्यांश ‘सनातन ओझिप्पू’ (उन्मूलन) का इस्तेमाल किया।

अमित  मालवीय के खिलाफ दर्ज किया गया था हेट स्पीच का मामला

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस भाषण का एक वीडियो X पर शेयर किया और सवाल पूछा कि क्या यह बयान ‘भारत की 80% आबादी के नरसंहार’ की अपील है, जो सनातन धर्म को मानते हैं। मालवीय की पोस्ट के बाद एक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि मालवीय ने समूहों के बीच दुश्मनी भड़काने के लिए स्टालिन के भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। शिकायत के आधार पर मालवीय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A (हेट स्पीच) और 505 (सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान) के तहत FIR दर्ज की गई।

मालवीय ने FIR रद करवाने के लिए कोर्ट का रुख किया। भाजपा नेता की तरफ से सीनियर एडवोकेट अनंता पद्मनाभन पेश हुए। तमिलनाडु की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल अजमल खान के साथ एडवोकेट अब्दुल कलाम आजाद पेश हुए।

जस्टिस श्रीमथी ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अभियोजन पूरी तरह से स्टालिन के भाषण में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘ओझिप्पू’ के मतलब पर आधारित था। कोर्ट ने कहा कि राज्य के अनुसार भी, इस शब्द का मतलब ‘खत्म करना’ होता है। फैसले में लिखा था, “‘खत्म करना’ शब्द के पर्यायवाची हैं जड़ से खत्म करना, हटाना, मिटाना, नष्ट करना, तबाह करना, पूरी तरह खत्म कर देना।”

इस मतलब को किसी धर्म पर लागू करते हुए, कोर्ट ने तर्क दिया कि ऐसी भाषा जरूरी तौर पर एब्स्ट्रैक्ट विचारों से आगे तक जाती है। कोर्ट ने कहा, ‘अगर सनातन धर्म नहीं होना चाहिए, तो सनातन धर्म को मानने वाले लोग भी नहीं होने चाहिए।’ इन हालात में, कोर्ट ने माना कि मालवीय की पोस्ट को, जिसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर के भाषण के नतीजों पर सवाल उठाया गया था, हेट स्पीच नहीं कहा जा सकता।

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