ऑल इंग्लैंड ओपन : लक्ष्य सेन दूसरी बार फाइनल में पहुंचे, कड़े संघर्ष में कनाडाई विक्टर लाई को शिकस्त दी
बर्मिंघम, 7 मार्च। प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप में शनिवार को भारत के शीर्षस्थ शटलर लक्ष्य सेन का अभियान खिताबी देहरी तक जा पहुंचा, जब उन्होंने पैर की मांसपेशियों में; खिंचाव व छालों से जूझते हुए कनाडाई के विक्टर लाई पर कठिन जीत से दूसरी बार बीडब्ल्यूएफ सुपर 1000 टूर्नामेंट के पुरुष एकल फाइनल में जगह बना ली।
सच पूछें तो BWF विश्व रैंकिंग में 12वें नंबर पर काबिज 24 वर्षीय लक्ष्य के लिए यह करिअर के सबसे अच्छे मुकाबलों में से एक साबित हुआ। उन्होंने युटिलिटा एरेना के कोर्ट नंबर एक पर खेले गए दिन के चौथे मैच में एक घंटे 37 मिनट तक खिंची कश्मकश के बाद 21 वर्षीय विक्टर पर 21-16, 18-21, 21-15 से जीत हासिल की, जिन्होंने पिछले वर्ष पेरिस में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था।
Historic final! 🔥🏸
Becomes only the second Indian to reach two finals at the legendary All England Open.
A moment of pride for Indian badminton 🇮🇳 pic.twitter.com/31UI0tlmsy
— BAI Media (@BAI_Media) March 7, 2026
इतिहास रचने से एक कदम दूर लक्ष्य
यहां तीन वर्षों में दूसरा और कुल तीसरा सेमीफाइनल खेलने उतरे अल्मोड़ावासी लक्ष्य का यह दूसरा फाइनल होगा। वर्ष 2022 में वह फाइनल में डेनिस स्टार विक्टर एक्सेल्सन से हारकर उपविजेता रहे थे। इस प्रकार देखें तो वह बर्मिंघम में इतिहास रचने से एक कदम दूर हैं। लक्ष्य की अब रविवार को फाइनल में दुनिया के 11वें नंबर के खिलाड़ी चीनी ताइपे के लिन चुन-यी से होगा।
A big moment at the Yonex All England Open 2026. 🏸
A photo dump from a night where every point meant everything. 📸🔥
Picture Credit: @badmintonphoto pic.twitter.com/gNLxzqHvOS
— BAI Media (@BAI_Media) March 7, 2026
भारत को बर्मिंघम में 25 वर्षों से एकल खिताब का इंतजार
वस्तुतः लक्ष्य अब इस बड़े खिताब के लिए भारत का 25 वर्षों का इंतजार खत्म करने से महज एक जीत दूर हैं। भारत के लिए प्रकाश पादुकोण (1980) और पुलेला गोपीचंद (2001) ही ऐसे खिलाड़ी हैं, जो ऑल इंग्लैंड ओपन खिताब जीत पाए हैं। उनके अलावा सिर्फ प्रकाश नाथ (1947) और साइना नेहवाल (2015) ही उप विजेता बनकर इसके करीब पहुंचे थे।
मैच की शुरुआत ही 52 शॉट की रैली से हुई
देखा जाए तो लक्ष्य ने जबर्दस्त मानसिक मजबूती, मजबूत डिफेंस और सटीक स्ट्रोकप्ले दिखाया। उन्होंने मुश्किल रैलियों में 86 शॉट लगाए। मैच की शुरुआत ही 52 शॉट की रैली से हुई। दोनों शटलर एक-दूसरे के डिफेंस को भेदते हुए 3-3 और 4-4 पर बराबरी पर थे।
विश्व नंबर 16 लाई के ऊंचे ‘टॉस’ शॉट ने कई दफा लक्ष्य को चौंका दिया, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपने बेहतर स्ट्रोकप्ले पर भरोसा रखते हुए स्कोर 8-8 से बराबर रखा। लक्ष्य फिर 10-8 से आगे हो गए, लेकिन लाई ने सीधे स्मैश और एक बढ़िया नेट शॉट से स्कोर फिर बराबर कर लिया।
लक्ष्य ने ब्रेक तक फोरहैंड ड्राइव से एक अंक की मामूली बढ़त बना ली। फिर वह कई सटीक स्मैश और नेट प्ले से 18-16 से आगे हो गए। लाई के लंबा शॉट मारने और एक शॉट से चूकने से लक्ष्य ने जल्द ही चार गेम प्वॉइंट हासिल कर लिए और कई आक्रामक स्ट्रोक लगाकर पहला गेम जीत लिया।
दूसरे गेम में लक्ष्य को पैर के छालों का उपचार कराना पड़ा
दूसरा गेम भी बराबरी पर शुरू हुआ, लेकिन लक्ष्य को अपने पैर के छालों के उपचार के लिए थोड़ी देर के लिए कोर्ट से बाहर जाना पड़ा, तब वह 3-4 से पीछे थे। खेल दोबारा शुरू होने पर लाई ने शानदार डिफेंस के दम पर 9-4 की बढ़त बना ली, जिसमें 59 शॉट की शानदार रैली भी शामिल थी। लक्ष्य ने ड्रॉप शॉट, सटीक बैकलाइन पुश और तेज नेट प्ले के जरिए धीरे-धीरे वापसी की। लेकिन लाई ने ब्रेक तक चार अंक की बढ़त बनाए रखी।
भारतीय खिलाड़ी ने सटीक बैकलाइन रिटर्न से 16-16 से बराबरी कर ली। लेकिन कनाडाई खिलाड़ी ने संयम बनाए रखा और फिर से 18-16 से बढ़त हासिल कर ली। उन्होंने इसके बाद दो गेम प्वॉइंट भी अर्जित किए और लक्ष्य का रिटर्न वाइड जाने से दूसरा गेम जीतकर 1-1 से बराबरी हासिल की।
अंतिम गेम में 86 शॉट की थका देने वाली रैली देखने को मिली
निर्णायक गेम में लक्ष्य शुरू में 4-2 से आगे हो गए। वहीं डाइव के दौरान अंगुली में चोट लगने के बाद लाई ने मेडिकल टाइमआउट लिया। कनाडाई खिलाड़ी ने फिर स्कोर 4-4 से बराबर किया। लेकिन 86 शॉट की थका देने वाली रैली खत्म होने से लय तय हो गई, जिसमें चेयर अंपायर ने यह फैसला करते हुए लक्ष्य को अंक दे दिया कि शटल लाई से टकराई थी।
मांसपेशियों में उपचार के चलते कोर्ट पर देरी से लौटे तो येलो कार्ड देखना पड़ा
लक्ष्य ने धीरे-धीरे बढ़त बनाई क्योंकि लाई के चेहरे पर थकान दिखने लगी थी। भारतीय खिलाड़ी 9-6 से आगे हो गया। एक जोरदार स्मैश और एक तेज नेट शॉट ने उन्हें ब्रेक तक 11-7 की बढ़त दिला दी। ब्रेक के दौरान लक्ष्य की जांघों की मांसपेशियों का उपचार किया गया और बाद में कोर्ट पर देर से लौटने पर उन्हें ‘येलो कार्ड’ दिखाया गया।
मांसपेशियों में खिंचाव के बावजूद लक्ष्य ने तब 15-9 की बढ़त बना ली, जब लाई का रिटर्न शॉट वाइड चला गया। जैसे-जैसे मुकाबला एक घंटे 30 मिनट का समय पार कर रहा था, गलतियां भी बढ़ने लगीं जिससे लाई ने अंतर 14-16 तक कम कर दिया।
दमदार स्मैश के साथ यादगार जीत पक्की कर ली
लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने फिर से जोश दिखाया और एक स्मैश मारकर स्कोर 17-14 कर दिया। फिर जब लाई ने वाइड शॉट लगाया तो बढ़त 18-15 हो गई। एक जबर्दस्त स्मैश के बाद लक्ष्य जीत से महज दो अंक की दूरी पर थे और लाई की नेट गलती ने भारतीय खिलाड़ी को पांच मैच प्वॉइंट दिला दिए। उन्होंने एक और दमदार स्मैश के साथ यादगार जीत पक्की कर ली।
‘अब मैं फाइनल का सच में बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं’
पहले ही दौर में विश्व नंबर एक व गत चैम्पियन शी युकी और क्वार्टर फाइनल में छठी सीड ली शी फेंग के रूप में दो चीनी सितारों को हतप्रभ कर चुके लक्ष्य ने विक्टर को हराने के बाद कहा, ‘मैं एक बार में सिर्फ एक अंक जुटा रहा था और तीसरा सेट शुरू करते ही मुझे पैरों की मांसपेशियों में थोड़ा खिंचाव महसूस हो रहा था। मुझे नहीं पता था कि मैं पूरा मैच खेल पाऊंगा या नहीं। मैं बस हर अंक के लिए लड़ने की कोशिश कर रहा था। और आगे के बारे में ज्यादा नहीं सोचा था।’
लक्ष्य ने कहा, ‘मुझे लगता है कि योजना यही थी कि पहले कुछ शॉट में स्मैश का इस्तेमाल कर रैली खत्म करूं और रैली को बहुत लंबा नहीं चलने दूं क्योंकि वह बहुत संतुलित खेल रहा था। अंत में हम दोनों बहुत थक गए थे, लेकिन मुझे लगता है कि आखिर में यह जरूरी था कि मैं थोड़ी रफ्तार बढ़ाऊं।’ फाइनल के बारे में लक्ष्य ने कहा, ‘अब मैं कल का सच में बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। एक दिन आराम करके और भी मजबूत होकर वापस आऊंगा।’
