दलीप ट्रॉफी फाइनल : किशन ने ठोका दोहरा शतक, 708 रनों तक जाकर थमी पूर्व क्षेत्र की पहली पारी

चेन्नई, 7 सितम्बर। एमए चिदांबरम स्टेडियम में लगातार दूसरे दिन पूर्व क्षेत्र के बल्लेबाज दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों पर हावी रहे और इसका नतीजा यह हुआ कि तीसरी बार दलीप ट्राफी पर नाम लिखाने के लिए प्रयासरत मेहमान दल ने फाइनल मुकाबले की अपनी पहली पारी 708 रनों तक पहुंचाकर खुद को लगभग अजेय स्थिति में ला खड़ा किया।

ईशान व शतकवीर कुशाग्र के बीच द्विशतकीय भागीदारी

पूर्व क्षेत्र को यह पहाड़ सरीखा स्कोर प्रदान करने में कप्तान ईशान किशन का अहम अंशदान रहा, जिन्होंने उमस भरे मौसम में पिछली शाम की शतकीय पारी को आगे बढ़ाते हुए न सिर्फ तूफानी दोहरा शतक (270 रन, 334 गेंद, 522 मिनट, सात छक्के, 30 चौके) ठोका वरन उन्हें कुमार कुशाग्र (101 रन, 132 गेंद, पांच छक्के, आठ चौके) और फिर अनुकूल रॉय (45 रन, 98 गेंद, चार चौके) का भी भरपूर साथ मिला।

कप्तान ने अनुकूल संग जोड़े 140 रन

पहले दिन के स्कोर 4-385 से सोमवार को आगे बढ़े किशन व कुशाग्र के, जिन्होंने प्रथम श्रेणी करिअर का छठा सैकड़ा पूरा किया, बीच पांचवें विकेट पर 230 रनों की द्विशतकीय भागीदारी हुई। उसके बाद किशन ने अनुकूल संग आक्रामक अंदाज दिखाते हुए फिर 140 रनों की साझेदारी कर दी।

चुनिंदा त्रिशतकवीर बल्लेबाजों के क्लब में शामिल नहीं हो सके

हालांकि अनुकूल संग शतकीय भागीदारी के बीच 611 के स्कोर पर किशन ने थकान के चलते कुछ देर के लिए पैवेलियन लौटने का फैसला (retired not out) किया, तब वह 250 रन बनाकर खेल रहे थे। लेकिन चाय के बाद 151वें ओवर में 680 के स्कोर पर मो. शमी सातवें बल्लेबाज के रूप में आउट हुए तो किशन ने फिर वापसी की। खैर, वह दलीप ट्रॉफी में तिहरा शतक लगाने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों के क्लब में शामिल नहीं हो सके और दिन का खेल खत्म होने से तनिक पहले पूर्व की पारी समाप्त हुई।

टेस्ट टीम में जगह बनाने का मजबूत दावा पेश किया

फिलहाल कुल मिलाकर देखें तो दूसरे दिन के आकर्षण का मुख्य केंद्र किशन ही रहे, जिन्होंने तीन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की मौजूदगी में यह यादगार पारी खेली और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपने सर्वोच्च स्कोर से तीन रनों के फासले पर पर जाकर आउट हुए। खेल समाप्ति से तनिक पहले ऑफ स्पिनर त्रिपूर्णा विजय (4-180) की गेंद पर उन्होंने जोरदार शॉट खेला, लेकिन गेंद सीधे साइट स्क्रीन के पास खड़े रविचंद्रन स्मरण के हाथों में चली गई। इसके बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय टेस्ट टीम में जगह बनाने का अपना मजबूत दावा पेश कर दिया।

दलीप ट्रॉफी में अब तक के दो त्रिशतकवीर हैं रमन लांबा व गगन खोड़ा

जहां तक दलीप ट्रॉफी में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का सवाल है तो वह दिल्ली के रमन लांबा के नाम है, जिन्होंने अक्टूबर, 1987 में उत्तर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए पश्चिम क्षेत्र के खिलाफ फाइनल में 320 रनों की पारी खेली थी। भिलाई में खेले गए उस मुकाबले में उत्तर क्षेत्र ने 868 रनों का पहाड़ खड़ा किया था, जो दलीप ट्रॉफी में अब तक किसी भी टीम का सर्वोच्च स्कोर है। रमन लांबा के अलावा दलीप ट्रॉफी के दूसरे त्रिशतकवीर गगन खोड़ा ने फरवरी, 2001 में यह उपलब्धि हासिल की थी। उन्होंने मध्य क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ नाबाद 300 रन बनाए थे।

करिअर का दूसरा प्रथम श्रेणी दोहरा शतक 270 गेंदों पर पूरा किया

खैर, पटना के 28 वर्षीय धाकड़ विकेटकीपर बल्लेबाज किशन की बात करें तो पहले दिन उन्होंने जहां 122 गेंदों पर शतक पूरा किया था वहीं दूसरे शतक के लिए उन्होंने 148 गेंदों का सामना किया। उन्होंने अपने करिअर का दूसरा प्रथम श्रेणी दोहरा शतक 270 गेंदों पूरा किया, जब उन्होंने कामचलाऊ स्पिनर देवदत्त पडिक्कल की गेंद को कवर के रास्ते सीमा रेखा के पार पहुंचाया।

स्कोर कार्ड

किशन की कुशाग्र व अनुकूल संग दो बड़ी भागीदारियों के बीच ही पूर्व क्षेत्र ने पहले सत्र में 106 और लंच के बाद के सत्र में 135 रन जोड़े। इन तीनों के अलावा मो. कोनैन कुरेशी (40 रन, 91 गेंद, एक छक्का, दो चौके) व मो. शमी (28 रन, 51 गेंद, चार चौके) के बीच सातवें विकेट पर भी 54 रनों की उपयोगी साझेदारी देखने को मिली। इसके पूर्व पहले दिन ओपनरद्वय अभिमन्यू ईश्वरन (72 रन), वैभव सूर्यवंशी (44 रन) व शिखर मोहन (85 रन) ने भी बड़ी पारियां खेली थीं।

दूसरे दिन भी प्रभाव नहीं छोड़ सके दक्षिण के गेंदबाज

दक्षिण क्षेत्र की बात करें तो उसके गेंदबाज, विशेषकर मुख्य तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज लगातार दूसरे दिन कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। सिराज ने सपाट पिच और उच्च स्तर की बल्लेबाजी के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर नजर आई। फॉर्म पाने को संघर्षरत सिराज ने 25 ओवरों में 140 रन खर्च किए। वहीं विजय के अलावा चामा मिलिंद व श्रेयस गोपाल ने दो-दो विकेट निकाले। मेजबानों ने पारी के दौरान कुल आठ गेंदबाजों का इस्तेमाल किया।

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