नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कंटेनर विनिर्माण, खेल उपकरण निर्माण, ग्रामीण स्थानीय शासन और केंद्रीय कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी।
मोदी कैबिनेट ने वित्त वर्ष 2039-40 तक 10,000 करोड़ रुपये के बजट वाली कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना, 2026 से 2033-34 तक 1,856.67 करोड़ रुपये की खेलो इंडिया खेल उपकरण विनिर्माण योजना और 2026-27 से 2030-31 तक 7,395.55 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी। इसके अलावा केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (DR) में तीन प्रतिशित की अतिरिक्त बढ़ोतरी को भी मंजूरी दी गई, जो 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होगी।
कंटेनर विनिर्माण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना
कैबिनेट ने वित्त वर्ष 2039-40 तक के लिए 10,000 करोड़ रुपए के बजट के साथ ‘कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना’ (सीएमपीएस) को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य भारत में विश्वस्तरीय और प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण इकोसिस्टम तैयार करना, आयात पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाना है। इसके तहत नई निर्माण इकाइयों को समर्थन देने के साथ मौजूदा कंटेनर निर्माण इकाइयों के विस्तार को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी।
A major boost to India’s maritime and logistics sector!
The Cabinet has approved the Container Manufacturing Promotion Scheme.
Key benefits include:
10-fold increase in domestic capacity to 7.5 lakh TEUs annually.
Financial support for new and existing manufacturers.
Globally competitive, quality-certified containers.
Reduced import dependence and stronger supply chains.
https://t.co/ecVpZPdELs
— Narendra Modi (@narendramodi) October 28, 2026
ब्याज सब्सिडी के लिए 859 करोड़ रुपये
योजना के तहत 859 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली ‘इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस’ (आईएसए) योजना शुरू की गई है। इसके तहत पात्र कंटेनर निर्माताओं को तीन प्रतिशत सालाना की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। यह सहायता उन पात्र टर्म लोन यानी पूंजीगत ऋण पर मिलेगी, जिनका इस्तेमाल ग्रीनफील्ड कंटेनर निर्माण इकाइयां स्थापित करने या मौजूदा कंटेनर निर्माण क्षमता के ब्राउनफील्ड विस्तार के लिए किया जाएगा।
कंटेनरों की बिक्री पर 8,891 करोड़ रुपये की सहायता
8,891 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस’ (ओईए) भी शुरू की गई है। इसके तहत वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुसार निर्मित और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे जाने वाले सभी कंटेनरों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य लागत के अंतर को कम करना और भारत में निर्मित कंटेनरों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।
इस योजना के निम्नलिखित मुख्य घटक हैं:
❖ 859 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली ‘इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस’ (आईएसए) योजना के तहत, कंटेनर निर्माताओं को 3 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी उन पात्र टर्म लोन (पूंजीगत ऋण) पर मिलेगी, जिनका उपयोग ‘ग्रीनफील्ड’ कंटेनर निर्माण इकाइयां स्थापित करने या मौजूदा कंटेनर निर्माण क्षमताओं के विस्तार (‘ब्राउनफील्ड’ विस्तार) के लिए किया गया हो।
❖ 8,891 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस’ (ओईए) शुरू की गई है। इसका उद्देश्य वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुसार निर्मित और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे जाने वाले सभी कंटेनरों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
इससे लागत के अंतर को कम करने और घरेलू स्तर पर निर्मित कंटेनरों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।❖ ‘डायनामिक लोंगिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग’ जैसी साझा सुविधाओं की स्थापना में सहायता के लिए 150 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन (प्रमाणीकरण) संबंधी सहयोग प्रदान करना।
विवरणः https://t.co/QPmqNRAyFm
#CabinetDecisions
(2/2)
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) October 28, 2026
टेस्टिंग और प्रमाणन सुविधाओं को 150 करोड़ रुपये
कंटेनर निर्माण क्षेत्र में टेस्टिंग और प्रमाणन को मजबूत करने के लिए 150 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ‘डायनामिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग’ जैसी साझा सुविधाओं की स्थापना में सहायता दी जाएगी।
कंटेनर निर्माण क्षमता 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचने का लक्ष्य
योजना के तहत भारत की वार्षिक घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता को बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू तक करने की परिकल्पना है, जो मौजूदा क्षमता की तुलना में लगभग दस गुना वृद्धि होगी। इससे गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के लिए भारत को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता वाला अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार तैयार होगा।
53,000 से अधिक रोजगार के अवसरों की संभावना
योजना से भारत की समुद्री और लॉजिस्टिक्स आपूर्ति शृंखलाओं के अनुकूलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे अनुमानित 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। कॉर्नर कास्टिंग, विशेष स्टील, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी इससे समर्थन मिलेगा।
खेल उपकरण विनिर्माण के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026 से 2033-34 की अवधि के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ ‘खेलो इंडिया खेल उपकरण विनिर्माण योजना’ को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य निवेश, विनिर्माण, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देना तथा वैश्विक खेल उपकरण क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करना है। योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी।
This is why the Khelo India Sports Goods Manufacturing Scheme cleared by the Cabinet will be a game changer:
Dedicated manufacturing zones for sports goods-related manufacturing.
Investment opportunities and MSME support.
Research, innovation and skill development.
Focus on quality.
More jobs and export opportunities.
It is a major push for Make in India, Aatmanirbhar Bharat and India’s global sporting ambitions!
https://t.co/31oUwTezkj
— Narendra Modi (@narendramodi) October 28, 2026
निवेश, तकनीक और निर्यात पर जोर
योजना के तहत निवेश, प्रौद्योगिकी अंगीकरण, अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार विकास के लिए लक्षित सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य भारत के खेल उपकरण विनिर्माण आधार को मजबूत करना और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में देश की स्थिति बेहतर करना है। यह योजना खेलो इंडिया नीति 2025, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग योजना’ के तहत:
🔹 नए निवेश और घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा
🔹 मौजूदा विनिर्माण क्लस्टरों को मजबूती और छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन
🔹 अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और नवीनीकरण के लिए ₹105 करोड़ का प्रावधान
🔹 अनुसंधान, डिजाइन और नवाचार पर विशेष जोरलक्ष्य: भारत के खेल उपकरण उद्योग को मजबूत बनाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना।
#CabinetDecisions #KheloIndia #SportsDevelopment
2/2
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) October 28, 2026
एकीकृत खेल उपकरण विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार होगा
योजना में क्लस्टर आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित ‘स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन’ (एसजीएमजेड) विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इन क्षेत्रों में निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परीक्षण सुविधाएं, डिजाइन एवं प्रोटोटाइप केंद्र तथा सहायक उद्यम एक ही जगह पर स्थित होंगे। ये क्षेत्र भव्य (बीएचओवीवाईए) योजना और एनआईसीडीसी औद्योगिक पार्कों के तहत मौजूदा औद्योगिक बुनियादी ढांचे के साथ अभिसरण के जरिए विकसित किए जाएंगे। इससे कुशल विनिर्माण, मजबूत उद्योग संपर्क और खेलकूद सामग्री की पूरी मूल्य शृंखला में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
घरेलू विनिर्माण और निवेश बढ़ाने के लिए 1,130 करोड़ रुपये
योजना के तहत एंकर इन्वेस्टमेंट सपोर्ट के जरिए प्रमुख घरेलू और वैश्विक निर्माताओं, ब्रांडों तथा रिटेल चेन को निर्धारित खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे मजबूत आपूर्तिकर्ता और सहायक इकोसिस्टम विकसित होगा। इसके साथ टर्नओवर लिंक्ड सपोर्ट घटक के जरिए अधिक उत्पादन, क्षमता विस्तार और निरंतर विनिर्माण विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के लिए संयुक्त रूप से 1,130 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने, निजी निवेश आकर्षित करने, रोजगार पैदा करने और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की उम्मीद है।
MSME और मौजूदा क्लस्टरों को मिलेगा समर्थन
खेल सामग्री क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की भूमिका को देखते हुए मौजूदा विनिर्माण क्लस्टरों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। मौजूदा खेल सामग्री विनिर्माण क्लस्टरों के उन्नयन के लिए सहायता दी जाएगी, जिसमें साझा सुविधाओं और साझा बुनियादी ढांचे का विकास शामिल होगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन के लिए 105 करोड़ रुपये
भारतीय खेल सामग्री की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत गुणवत्ता और प्रदर्शन मानकों पर जोर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन हासिल करने और उनके नवीनीकरण के लिए निर्माताओं को सहायता दी जाएगी। इसके लिए 105 करोड़ रुपये का परिव्यय तय किया गया है। इससे उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान बनाने और भारत में बनी खेल सामग्री के प्रति भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
अनुसंधान और नवाचार के लिए उत्कृष्टता केंद्र
योजना में खेल उपकरण, सामग्री विज्ञान, सुरक्षात्मक गियर और उन्नत विनिर्माण तकनीकों में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की सहायता दी जाएगी। अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के साथ अभिसरण के जरिए भी बढ़ावा दिया जाएगा। स्टार्टअप इंडिया पहल के अनुरूप स्टार्टअप के लिए विशेष सहायता दी जाएगी। इससे नई तकनीकों, प्रक्रियाओं और उत्पादों के विकास, परीक्षण, सत्यापन और व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
खेल सामग्री क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार होगा
खेल सामग्री क्षेत्र की रोजगार प्रधान प्रकृति को देखते हुए उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास पहलों को समर्थन दिया जाएगा। इन्हें कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा संबंधित उद्योग हितधारकों के सहयोग से लागू किया जाएगा। इससे कुशल श्रमशक्ति की बढ़ती मांग को पूरा करने और क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास में मदद मिलेगी।
वैश्विक बाजार में भारतीय खेल सामग्री की पहुंच बढ़ेगी
योजना के तहत ब्रांडिंग, आउटरीच और बाजार विकास की समर्पित पहलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय खेल सामग्री बाजारों में भारत की मौजूदगी बढ़ाने का लक्ष्य है। निर्यात संवर्धन मिशन का लाभ उठाकर भारतीय खेल सामग्री की उपलब्धता, बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं को मिलेगा समर्थन
उच्च गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित खेल सामग्री के निर्माण को बढ़ावा देकर यह योजना भारत के खेल क्षेत्र और एथलीट विकास कार्यक्रमों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। उन्नत नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा और विनिर्माण क्षमता खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसी पहलों को पूरक बनाएगी। योजना से भारत को खेल सामग्री के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में स्थापित करने की उम्मीद है। इससे विकास, रोजगार और निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में ‘प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना’ (पीएम वीजीएसवाई) को मंजूरी दी है। इसे विकसित भारत की राष्ट्रीय कल्पना के अनुरूप अगली पीढ़ी की शासन व्यवस्था में बदलाव की पहल के रूप में लागू किया जाएगा। योजना की अवधि 16वें वित्त आयोग की अवधि के साथ समाप्त होगी।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 के लिए केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी
🔸यह विकसित भारत की राष्ट्रीय कल्पना के अनुरूप अगली पीढ़ी की शासन व्यवस्था में बदलाव की पहल है।
🔸इस योजना का कुल परिव्यय 7,395.55 करोड़ रुपये है, जिसमें केन्द्र का हिस्सा 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 2,526.07 करोड़ रुपये है
🔸इस योजना से 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ-साथ पंचायत पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
विवरण: https://t.co/skfHdG4yDV
#CabinetDecisions
@mopr_goi @MoRD_GoI
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) October 28, 2026
7,395.55 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय
योजना का कुल परिव्यय 7,395.55 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र का हिस्सा 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्यों का हिस्सा 2,526.07 करोड़ रुपये होगा।
2.55 लाख से अधिक पंचायतों को लाभ
योजना से 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ पंचायत पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। जागरूकता से जुड़े प्रत्येक कार्यक्रम के माध्यम से कम से कम एक करोड़ नागरिकों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रति वर्ष 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाओं पर जोर
योजना के तहत सहभागी और साक्ष्य आधारित नियोजन के माध्यम से ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर प्रति वर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने में सहायता दी जाएगी। इन योजनाओं में गांवों की प्राथमिकताओं, संबंधित केंद्रीय एवं राज्य विभागों के लक्षित कार्यों और उपलब्ध संसाधनों को एक साथ शामिल किया जाएगा।
एक अभियान से 1 करोड़ नागरिकों तक पहुंच
मौजूदा डिजिटल एवं जनसंपर्क मंचों, ग्राम सभाओं और पंचायतों के अन्य मंचों का इस्तेमाल कर प्रत्येक समन्वित जागरूकता अभियान के माध्यम से कम से कम एक करोड़ नागरिकों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय पहलों की समझ बढ़ाना तथा उनके स्थानीय प्रभावों पर जागरूकतापूर्ण चर्चा को प्रोत्साहित करना है।
32 लाख प्रतिनिधियों की शासन क्षमता मजबूत होगी
समग्र नियोजन, नागरिकों के साथ संवाद, संसाधन प्रबंधन और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की दिशा में प्रगति बेहतर करने के लिए हर साल लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों की शासन संबंधी क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा।
ऑनलाइन ऑडिट और वित्तीय जवाबदेही पर जोर
ऑडिटऑनलाइन के माध्यम से हर साल कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट योजनाओं को तैयार करने और संबंधित ऑडिट समय पर पूरा करने में सहायता दी जाएगी। लेखांकन व्यवस्था में सुधार, सार्वजनिक प्रकटीकरण और स्वयं के स्रोतों से राजस्व जुटाने के साथ इससे उपलब्ध निधियों के प्रति जवाबदेही मजबूत होगी और पंचायतों को वित्तीय रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। योजना के तहत कोई स्थायी पद सृजित नहीं किया जाएगा। हालांकि, योजना के उद्देश्यों को पूरा करने और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए संस्थागत तंत्र के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर जरूरत के अनुसार संविदात्मक मानव संसाधन नियुक्त किए जा सकेंगे।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी योजना
पीएम वीजीएसवाई सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी। इसमें उन गैर-अनुच्छेद IX क्षेत्रों के ग्रामीण स्थानीय शासन संस्थानों यानी पारंपरिक स्थानीय निकायों को भी शामिल किया जाएगा, जहां पंचायतें अस्तित्व में नहीं हैं।
ग्राम पंचायतों को विकास के केंद्र में रखा गया
योजना के तहत ग्राम पंचायत को समग्र स्थानीय नियोजन और विकास पहलों के समन्वय के केंद्र में रखा जाएगा। पंचायतों को गांवों की प्राथमिकताओं, संबंधित सरकारी पहलों और उपलब्ध संसाधनों को एक साथ जोड़ने में सहायता दी जाएगी, ताकि वे जमीनी स्तर पर विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में काम कर सकें।
राष्ट्रीय सुधारों को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने की पहल
पिछले 12 वर्षों में किए गए राष्ट्रीय सुधारों और सरकारी पहलों ने ग्राम अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने के अवसर पैदा किए हैं। इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए जमीनी स्तर पर जागरूक भागीदारी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नियोजन की जरूरत है। 16वें वित्त आयोग द्वारा 2026-27 से 2030-31 के दौरान ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए लगभग 4.35 लाख करोड़ रुपए के अनुदान की सिफारिश किए जाने के मद्देनजर पंचायतों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, सरकारी योजनाओं, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आकांक्षाओं को एक साथ जोड़ सकें।
साझा डिजिटल मंच पर तैयार होंगी ग्राम पंचायत विकास योजनाएं
पीएम वीजीएसवाई विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, क्षमता निर्माण और ग्राम सभाओं के माध्यम से जागरूकतापूर्ण विचार-विमर्श को बढ़ावा देगी। योजना के तहत सभी संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों और राज्य सरकारों की नियोजन प्रक्रियाओं को साझा डिजिटल मंच पर एकीकृत किया जाएगा, ताकि समग्र ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करने में सहयोग बढ़े। इससे पंचायतों और विभागों को विकास संबंधी कमियों की पहचान करने, विभिन्न पहलों के बीच तालमेल स्थापित करने और उपलब्ध संसाधनों, जिनमें केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान भी शामिल हैं, का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। व्यक्तिगत योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विभागों की मौजूदा व्यवस्थाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
पंचायतों को विकास की स्थिति की डिजिटल जानकारी मिलेगी
ई-ग्रामस्वराज और मौजूदा ई-पंचायत प्रणालियों के आधार पर सरकारी योजनाओं, लाभार्थियों, मिलने वाले लाभों, सामुदायिक परिसंपत्तियों और उपलब्ध संसाधनों से संबंधित जानकारी साझा डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पंचायतों को कमियों की पहचान करने, स्थानीय जरूरतों को पूरा करने और नियोजन, समन्वय तथा निगरानी में सुधार करने में मदद मिलेगी।
17 भाषाओं में AI मंच से बढ़ेगा संवाद
सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय पहलों की जानकारी सरल एवं सुगम भाषा में देने के लिए मौजूदा प्रशिक्षण, डिजिटल और जनसंपर्क मंचों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें पंचम भी शामिल है, जो 17 भारतीय भाषाओं में एआई आधारित बहुभाषी और द्विपक्षीय संचार मंच है। ग्राम सभाओं और पंचायतों के मंचों के जरिए सामुदायिक चर्चाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्थानीय जरूरतों और ग्राम विकास लक्ष्यों से जोड़ा जा सके।
पारदर्शी संसाधन उपयोग और आत्मनिर्भर पंचायतों पर जोर
योजना पंचायतों की क्षमता को मजबूत करेगी, ताकि वे वित्त आयोग के अनुदान और अन्य निधियों का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें, स्वयं के स्रोतों से राजस्व जुटा सकें तथा ऑनलाइन लेखांकन, ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण सुनिश्चित कर सकें। इससे संसाधनों के पारदर्शी उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय विकास संबंधी कमियों को दूर करने के साथ जवाबदेह एवं आत्मनिर्भर पंचायतों को प्रोत्साहन मिलेगा।
राज्यों के जरिए लागू होगी योजना
योजना का कार्यान्वयन संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के माध्यम से किया जाएगा। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश योजना के उद्देश्यों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप गतिविधियों, प्राथमिकताओं और जरूरतों का उल्लेख करते हुए वार्षिक कार्ययोजनाएं प्रस्तुत करेंगे। नामित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति लागू प्रक्रियाओं और मानदंडों के अनुसार इन कार्ययोजनाओं का मूल्यांकन कर उन्हें मंजूरी देगी। केंद्र सरकार और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी जिम्मेदारियों वाले क्षेत्रों में काम करेंगे। इसके लिए समन्वय, तकनीकी सहायता, निगरानी और समीक्षा की व्यवस्था होगी। जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मौजूदा संस्थागत, क्षमता निर्माण, डिजिटल और संचार प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा।
केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में 3% की बढ़ोतरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत (DR) की एक अतिरिक्त किस्त जारी करने को भी मंजूरी दी है। यह बढ़ोतरी एक जुलाईस 2026 से प्रभावी होगी। इसके तहत मूल वेतन और पेंशन के मौजूदा 60% की दर में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई है, ताकि बढ़ती महंगाई की भरपाई की जा सके।
कैबिनेट ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत को मंजूरी दी
🗓️यह 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होगा।
◾️इसमें मूल वेतन/पेंशन के मौजूदा 60 प्रतिशत की दर के अतिरिक्त 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, ताकि बढ़ती महंगाई की भरपाई की जा सके।
विवरण: https://t.co/h0guiG9NAH
#CabinetDecisions @DoPTGoI
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) October 28, 2026
48.54 लाख कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को लाभ
डीए और डीआर में इस बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर सालाना 10,016.10 करोड़ रुपए का कुल अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे केंद्र सरकार के लगभग 48.54 लाख कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।
सातवें वेतन आयोग के फॉर्मूले के आधार पर फैसला
डीए और डीआर में यह बढ़ोतरी सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्वीकृत फॉर्मूले के अनुसार की गई है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई में बढ़ोतरी के अनुरूप अतिरिक्त वित्तीय राहत मिलेगी।


