रांची, 23 अगस्त। झारखंड के चर्चित JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कथित भर्ती सिंडिकेट के काम करने के संगठित तरीके सामने आ रहे हैं। सीआईडी और विशेष जांच दल (SIT) की अब तक की जांच, आरोपियों के बयानों और लगातार पूछताछ में परीक्षा के विज्ञापन से लेकर अंतिम चयन और इंटरव्यू तक कथित ‘सेटिंग’ का नेटवर्क सामने आया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में इस कथित नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की उगाही की गई। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी समानांतर जांच शुरू की है। जांच के केंद्र में परीक्षा आयोजित करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) भी है।
अभय तिवारी को तीसरी बार रिमांड पर लिया गया
अब तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर सीआईडी ने TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी को मामले का अहम आरोपी माना है। सीआईडी ने शनिवार को उसे तीसरी बार तीन दिन की रिमांड पर लिया है। अभय तिवारी की पत्नी सुषमा तिवारी और भाई अक्षय तिवारी से भी आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है। जांच में आरोपियों के बयानों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में कथित तौर पर तय रकम की जानकारी सामने आई है।
JPSC में अंतिम चयन और इंटरव्यू के लिए करोड़ों की ‘डील’?
जांच के अनुसार, 11वीं से 14वीं JPSC परीक्षा तक अंतिम चयन और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के नाम पर कथित तौर पर बड़ी रकम वसूली गई। 14वीं JPSC परीक्षा में सामान्य और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए करीब एक करोड़ रुपये, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए लगभग 80 लाख रुपये तक की रकम तय किए जाने का दावा जांच में सामने आया है।
पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक से पूछताछ में ‘ऊपरी दबाव’ का दावा
JPSC की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ में भी जांचकर्ताओं को अहम जानकारी मिलने का दावा किया गया है। उनके बयानों के मुताबिक, 11वीं, 13वीं और 14वीं JPSC के विवादित परिणाम तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कथित निर्देश और दबाव में जारी किए गए थे। हालांकि, श्वेता गुप्ता ने खुद को किसी तकनीकी हेरफेर से अलग बताते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन करने की बात कही है।
OMR शीट में कथित हेरफेर का तरीका सामने आया
मामले का सबसे गंभीर पहलू OMR शीट से कथित छेड़छाड़ से जुड़ा है। डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद एबाद के बयानों के आधार पर जांच एजेंसियों को कथित तौर पर पता चला है कि चिन्हित अभ्यर्थियों की OMR शीट में सही उत्तर वाले गोले जानबूझकर खाली छोड़े जाते थे। इसके बाद आधिकारिक आंसर की उपलब्ध होने पर स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के दौरान उन खाली स्थानों पर कथित तौर पर सही उत्तर दर्ज किए जाते थे। जांच के अनुसार, पहले से चिन्हित अभ्यर्थियों के रोल नंबर तकनीकी टीम तक पहुंचाए जाते थे। अब सीआईडी मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक मिलान कर रही है, ताकि कथित तकनीकी हेरफेर के ठोस साक्ष्य जुटाए जा सकें।
JSSC-CGL में 12 लाख रुपये लेकर रटवाए गए सवालों का आरोप
जांच में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। एजेंसियों के मुताबिक, चुनिंदा अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12-12 लाख रुपये वसूले गए और उन्हें परीक्षा से पहले एक सुरक्षित स्थान पर एकत्र किया गया। आरोप है कि वहां उन्हें करीब 65 प्रश्नों के उत्तर याद करवाए गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि परीक्षा से ठीक पहले ये सवाल और उनके सटीक उत्तर कथित तौर पर सिस्टम से बाहर कैसे पहुंचे और इस पूरी प्रक्रिया में परीक्षा संचालन से जुड़े कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे।
TDPL की भूमिका जांच के घेरे में
परीक्षा संचालन के लिए जिम्मेदार आउटसोर्स एजेंसी TDPL की भूमिका जांच का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। एजेंसी के डिजिटल रिकॉर्ड, OMR डेटा तक तकनीकी कर्मचारियों की पहुंच और उस पहुंच के कथित दुरुपयोग की जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 25 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने JSSC-CGL समेत 22 भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द, 6 को स्थगित और 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने का निर्णय लिया था।
आरोपों को अदालत में साबित करना बड़ी चुनौती
अब सीआईडी और SIT के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों के बयानों को मूल OMR शीट, डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के ट्रेल से जोड़ना है। जांच एजेंसियां इन सभी कड़ियों को जोड़कर ऐसे साक्ष्य तैयार करने में जुटी हैं, जिन्हें अदालत में कानूनी तौर पर मजबूत और स्वीकार्य प्रमाण के रूप में पेश किया जा सके।


