एशियाई खेल : भारतीय पुरुष स्क्वाश टीम अपना खिताब नहीं बचा सकी, महिला टीम को भी कांस्य पदक

नागोया, एक अक्टूबर। एशियाई खेलों (Aichi-Nagoya 2026) की स्क्वाश प्रतियोगिता में गुरुवार को गत चैम्पियन भारतीय पुरुष टीम का आघात लगा, जब वह अपने खिताब की रक्षा नहीं कर सकी और सेमीफाइनल में मलेशिया के हाथों 1-2 से पराजय के बाद उसे कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

अनाहत की हार भारत के लिए महंगी साबित हुई

वहीं भारतीय महिला टीम भी तन्वी खन्ना की शानदार वापसी के बावजूद हांगकांग के हाथों 1-2 से हार गई और उसे भी कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह की पहले ही मैच में हार भारत के लिए महंगी साबित हुई।

2 रजत सहित 5 पदकों के साथ स्क्वाश में भारतीय अभियान समाप्त

भारतीय स्क्वाश खिलाड़ियों ने इसके साथ ही दो रजत व तीन कांस्य सहित कुल पांच पदकों के साथ मौजूदा संस्करण में अपने अभियान का समापन किया। इस दौरान भारत ने एकल में दो रजत पदक, टीम स्पर्धा में दो कांस्य पदक और मिश्रित युगल में एक कांस्य पदक जीता।

4 मैच अंक गंवाने के बाद हांगकांग की सिक युक चान से हारीं अनाहत

देखा जाए तो भारतीय महिला टीम का पदक पहले ही पक्का हो चुका था और एकल में रजत पदक जीतने वालीं 18 वर्षीय अनाहत पर काफी जिम्मेदारी थी। वहीं भारत की नजरें पिछले हांगझू खेलों के प्रदर्शन में सुधार पर भी थीं। हालांकि विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज अनाहत ने चार मैच प्वॉइंट गंवाए और दुनिया की 25वें नंबर की खिलाड़ी सिन युक चान के खिलाफ रोमांचक मुकाबले में 2-3 (11-9, 11-8, 6-11, 11-13, 10-12) से हार गईं।

तन्वी ने शानदार वापसी दिलाई, लेकिन जोशना भी हार गईं

इसके बाद दुनिया की 73वें नंबर की खिलाड़ी तन्वी ने शानदार वापसी करते हुए दुनिया की 40वें नंबर की खिलाड़ी का यी ली को 3-1 (4-11, 13-11, 11-9, 13-11) से हराकर तीन मैचों के मुकाबले में भारत को बराबरी दिलाई। हालांकि अनुभवी जोशना चिनप्पा को दुनिया की 39वें नंबर की खिलाड़ी हो जे लोक के खिलाफ सिर्फ 21 मिनट तक चले मुकाबले 0-3 (4-11, 7-11, 9-11) से हार का सामना करना पड़ा, जिससे भारत ने मुकाबला गंवा दिया।

बेशक, मैं दोनों स्पर्धाओं में पदक जीतकर खुश हूं – अनाहत

जहां तक अनाहत का सवाल है तो महिला एकल में जीते रजत पदक के साथ एशियाई खेलों के उनके पदकों की संख्या अब चार हो गई है। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में दो कांस्य पदक जीते थे। अनाहत ने कहा, ‘बेशक, मैं दोनों स्पर्धाओं में पदक जीतकर खुश हूं और मुझे दोनों में इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। लेकिन मैं इस प्रतियोगिता से जितना संभव हो सके, उतना सीखने की कोशिश करूंगी।’

उन्होंने कहा, ‘यह काफी लंबे 14 दिन रहे, जिसमें बहुत ज्यादा स्क्वाश खेलना पड़ा। इससे मैं बहुत कुछ सीख सकती हूं। मैं वापस जाकर इन सभी चीजों की समीक्षा करूंगी और उन पर विचार करूंगी। सत्र अभी शुरू ही हुआ है।’

पुरुष वर्ग में वीर ने अच्छी शुरुआत दी, लेकिन अभव व सेंथिलकुमार हारे

उधर पुरुष टीम के सेमीफाइनल में वीर चोटरानी ने संजय जीवा को 11-4, 11-8, 11-5 से हराकर भारत की उम्मीदों को बनाए रखा था। लेकिन अभय सिंह और सेंथिलकुमार क्रमशः ऐन योव एनजी और अमीशनराज चंद्रन से हार गए।

पुरुष एकल फाइनल में ऐन योव एनजी से पराजय का सामना करने वाले अभय हिसाब बराबर नहीं कर सके और उन्हें 8-11, 8-11, 8-11 से हार का सामना करना पड़ा। सेंथिलकुमार का सामना अपने से कम रैंकिंग वाले खिलाड़ी के खिलाफ था,  लेकिन चंद्रन उनसे बेहतर साबित हुए। उन्होंने सेंथिलकुमार को 10-12, 11-6, 11-8, 11-9 से हराकर मलेशिया को फाइनल में पहुंचाया, जहां उसका सामना पाकिस्तान से होगा।

टेनिस : 40 वर्षों में पहली बार खाली हाथ लौटेगा भारतीय दल

दूसरी तरफ भारतीय टेनिस टीम का प्रदर्शन बहुत खराब रहा और उसे 1986 के बाद यानी 40 वर्षों में पहली बार एशियाई खेलों से खाली हाथ लौटना पड़ेगा। सुमित नागल की आज पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में पराजय के साथ ही भारतीय चुनौती समाप्त हो गई।

एकल क्वार्टर फाइनल में नागल की हार भारतीय चुनौती खत्म

पदक की दावेदार युगल टीमों के बुधवार को ही बाहर होने के बाद भारत की उम्मीदों का दारोमदार एकल रैंकिंग में नंबर एक खिलाड़ी सुमित पर था, जो चीन के यिबिंग वू से एक घंटे 38 मिनट तक चले मैच में 4-6, 4-6 से हार गए।

देखा जाए तो भारत ने 1990 के बाद से हर एशियाई खेल में टेनिस में पदक जीते हैं और इस बार भी कम से कम तीन पदकों की उम्मीद थी। बीते दिनों सियोल में डेविस कप में दक्षिण कोरिया से मिली हार के बाद एशियाई खेलों पदक जीतने से भारतीय टेनिसप्रेमियों को तनिक राहत मिलती, लेकिन यहां भी निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा।

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