हरीश रावत ने कांग्रेस के पदों से दिया इस्तीफा, ओएसडी के ठिकानों पर ED की कार्रवाई के बाद बड़ा फैसला

देहरादून, 12 सितंबर। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने शनिवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) में अपने पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया। यह फैसला उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद लिया गया।

रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी भी कृत्य की वजह से कांग्रेस के संघर्ष को कोई नुकसान पहुंचे। हालांकि, उन्होंने अपने सहयोगी पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर अविश्वास जताया और कहा कि मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।

  • क्या है पूरा मामला?

प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की वर्ष 2016 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में कई ठिकानों पर कार्रवाई की। इसी कार्रवाई के दौरान हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों से भारी मात्रा में नकदी और गहने बरामद किए जाने की खबर सामने आई।

रावत ने कहा कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं और उनके राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने जीना को विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताते हुए कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी ओर से किसी तरह की गलती या अनियमितता का सबूत मिलता है तो उन्हें इस पर शर्मिंदगी होगी। हालांकि, रावत ने कहा कि फिलहाल उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है और मामले की वास्तविकता आगे की जांच से स्पष्ट होगी।

  • ‘पार्टी के संघर्ष को कमजोर नहीं होने दूंगा’

अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर काफी कुछ दांव पर लगा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी के संघर्ष पर किसी तरह का असर पड़े।

रावत ने कहा कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए सरकारी पद से इस्तीफा देने का सवाल नहीं है। लेकिन वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। उन्होंने इन दोनों जिम्मेदारियों से हटने का फैसला किया है।

  • UKSSSC के गठन और भर्तियों पर क्या बोले रावत?

हरीश रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में सरकारी पदों के लिए 42 हजार से अधिक भर्तियां की गई थीं। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं आयोजित करने के लिए मजबूर किया गया और मेडिकल तथा शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए भर्ती बोर्ड भी बनाए गए। रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनकी सरकार की ओर से कोई गलती हुई है, तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगने के लिए तैयार हैं।

  • UKSSSC चेयरमैन की नियुक्ति पर भी दी सफाई

हरीश रावत ने UKSSSC के तत्कालीन चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नियुक्ति संबंधित अधिकारी के पिछले सर्विस रिकॉर्ड को देखते हुए की गई थी। रावत के मुताबिक, शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) ने इस नियुक्ति को लेकर उनसे मुलाकात की थी। रावत ने कहा कि आज भी उनका मानना है कि खंडूरी ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ काम किया।

  • ‘सबूत हैं तो CBI, ED या पुलिस को दें’

रावत ने कहा कि यदि किसी के पास भर्ती और नियुक्तियों से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका का कोई ठोस सबूत है तो उसे सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े पदों पर जिम्मेदारी संभालने वाले हर व्यक्ति को गलत प्रलोभनों से बचना चाहिए। यदि उनकी ओर से कोई गलती हुई है और उससे राज्य के युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, तो वह खुद को सजा का हकदार मानते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्त किए जाने वाले किसी व्यक्ति के भविष्य के आचरण का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं होता। उन्होंने भर्ती आयोग के पूर्व अध्यक्ष से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी देते समय उसके भविष्य में गलत कार्य करने की आशंका पहले से नहीं जानी जा सकती। रावत ने एक बार फिर कहा कि यदि उनकी ओर से कोई गलती साबित होती है तो कानून के अनुसार उन्हें सजा मिलनी चाहिए और वह राज्य की जनता से इसके लिए माफी मांगेंगे।

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