बार-बार खाने या भूखे रहने की आदत हो सकती है खतरनाक, होम्योपैथी से संभव है ईटिंग डिसऑर्डर का जड़ से इलाज
जयपुर 1 जून । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट दिखने और परफेक्ट बॉडी पाने की चाह कई बार लोगों को ऐसी आदतों की ओर धकेल देती है, जो धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं। ऐसी ही एक समस्या है ‘ईटिंग डिसऑर्डर’, जिसे आमतौर पर सामान्य डाइटिंग या खाने की खराबी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) और जयपुर के वरिष्ठ होम्यो चिकित्सक डॉ. एन. सी. पंवार के अनुसार, यह केवल भोजन से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि व्यक्ति की भावनाओं, आत्मविश्वास और बॉडी इमेज से जुड़ा एक गंभीर मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति समाज के दबाव, बुलिंग या तनाव के कारण या तो भूखा रहने लगता है या फिर बार-बार खाता है।
इस समस्या के कारण कुपोषण, दिल की कमजोरी और गंभीर अवसाद जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। डॉ. पंवार के अनुसार, चूंकि ईटिंग डिसऑर्डर का सीधा संबंध मरीज के मानसिक तनाव, अपराधबोध और भावनात्मक असंतुलन से है, इसलिए इसका इलाज भी केवल डाइट चार्ट बदलने से नहीं बल्कि मानसिक स्तर पर होना चाहिए। इस दिशा में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति बेहद कारगर और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई है। होम्योपैथी विशेषज्ञों का मानना है कि ईटिंग डिसऑर्डर (जैसे एनोरेक्सिया या बुलिमिया) महज़ एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मन और शरीर के बीच बिगड़े तालमेल का नतीजा है।
होम्योपैथी में ‘होलिस्टिक अप्रोच’ यानी संपूर्ण स्वास्थ्य के सिद्धांत पर काम किया जाता है, जिसमें मरीज के केवल शारीरिक लक्षणों को ही नहीं, बल्कि उसके मानसिक तनाव, बचपन के आघात, कम आत्मविश्वास और डिप्रेशन के मूल कारणों को समझा जाता है। इस विकार के इलाज के लिए होम्योपैथी में मरीज की ‘कॉन्स्टिट्यूशनल केस टेकिंग’ (विस्तृत इतिहास) ली जाती है। उदाहरण के लिए, जो लोग मानसिक तनाव या किसी सदमे के कारण खाना पूरी तरह छोड़ देते हैं, उनके लिए इग्नेशिया (Ignatia) जैसी दवाएं मानसिक संभल देने का काम करती हैं।
वहीं, जो युवा अपने शरीर की बनावट को लेकर अत्यधिक संवेदनशील होते हैं या खुद से नफरत करने लगते हैं, उनके इलाज में नैट्रम म्यूर (Natrum Mur) और आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album) जैसी औषधियां प्रभावी साबित होती हैं। यदि तनाव के कारण कोई व्यक्ति भूख न होने पर भी बार-बार खाता है (बिंग ईटिंग), तो उसकी इस अनियंत्रित इच्छा और पाचन क्रिया को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका (Nux Vomica) या पल्साटिला (Pulsatilla) जैसी दवाएं दी जाती हैं।
होम्योपैथिक दवाएं बिना किसी साइड-इफेक्ट के मस्तिष्क में न्यूरोकेमिकल्स को संतुलित करती हैं, जिससे मरीज का खुद के प्रति नजरिया बदलता है, उसका तनाव कम होता है और भोजन के साथ उसका संबंध प्राकृतिक रूप से सामान्य होने लगता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ईटिंग डिसऑर्डर के संकेतों को पहचानकर किसी कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श लें, क्योंकि यह चिकित्सा पद्धति बिना किसी लत या नुकसान के इस खामोश लड़ाई को पूरी तरह जीतने में मदद कर सकती है।
