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फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से 5 दिनों की सशर्त जमानत, लेकिन जेल में ही रहना होगा

Vinayak Barot
Last updated: July 8, 2022 2:51 pm
Vinayak Barot
Published: July 8, 2022
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नई दिल्ली, 8 जुलाई। फैक्ट चेकर वेबसाइट अल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में दर्ज मामले में सशर्त जमानत दे दी है। जुबैर की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पांच दिनों के लिए अंतरिम जमानत इस शर्त पर दी कि वह मामले से संबंधित मुद्दे पर कोई नया ट्वीट पोस्ट नहीं करेंगे और सीतापुर मजिस्ट्रेट की अदालत के अधिकार क्षेत्र को नहीं छोड़ेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जुबैर बेंगलुरु या कहीं और किसी इलेक्ट्रोनिक सबूत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे। कोर्ट मामले पर फिर पांच दिन बाद सुनवाई करेगा। इसके बावजूद जुबैर को जेल में ही रहना होगा क्योंकि उन पर अभी दिल्ली में भी केस दर्ज हैं। मोहम्मद जुबैर को गत 27 जून को दिल्ली पुलिस ने सबसे पहले धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

मो. जुबैर के खिलाफ यह था सीतापुर का मामला

मो. जुबैर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 10 जून के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें सीतापुर में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि जब जांच प्रारंभिक चरण में है तो हस्तक्षेप करना जल्दबाजी होगी।

उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर करते हुए जुबैर ने मामले में जांच पर रोक लगाने और यूपी पुलिस को प्राथमिकी के आधार पर ‘आगे बढ़ने, मुकदमा चलाने या गिरफ्तार नहीं करने’ के लिए निर्देश देने की भी मांग की थी। प्राथमिकी एक ट्वीट के लिए दर्ज की गई थी जिसमें उन्होंने कथित तौर पर हिन्दू संत यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ट्विटर पर ‘घृणा फैलाने वाले’ कहा था।

जुबैर की एक अन्य याचिका पर यूपी पुलिस को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही जुबैर की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यूपी पुलिस को नोटिस दी है। याचिका में जुबैर ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में यूपी पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर को रद करने की मांग की है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था।

एसजी तुषार मेहता ने जुबैर के वकील पर तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि गुरुवार को जुबैर के वकील ने कहा कि उनकी जान को खतरा है। मेहता ने कहा, ‘वह न्यायिक रिमांड में है, उनकी जमानत कल सीतापुर अदालत ने खारिज कर दी थी और उसे रिमांड पर भेज दिया गया था। इस तथ्य का शीर्ष अदालत में खुलासा नहीं किया गया। यह तथ्यों को छिपाने का प्रयास है।’

तुषार मेहता ने कहा, ‘तथ्यों को छिपाने के इस तरह के आचरण को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। वह इस अदालत को यह बताए बिना कि सीतापुर अदालत ने कल उनकी जमानत खारिज कर दी थी, वह सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांग रहे हैं।’

वहीं, इस पर जुबैर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिका में लिखा गया है कि सीतापुर पुलिस जुबैर की पुलिस हिरासत की मांग कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में जिस आदेश को चुनौती दी गई है, वह इलाहाबाद हाई कोर्ट का है।

जुबैर के वकील गोंजाल्वेस बोले – कोई आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता

गोंजाल्वेस का कहना था कि जुबैर के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘इस मामले की नींव एक ट्वीट है। हम कार्यवाही को रद करने की मांग करते हैं और पुलिस या न्यायिक हिरासत के प्रश्न अब अप्रासंगिक हैं। कोई मामला नहीं बनता है और कार्यवाही को रद्द करने की आवश्यकता है।’

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