नई दिल्ली, 7 सितम्बर। दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने से पांच छात्रों सहित सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया और दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पीजी-हॉस्टल की जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने इस मामले में काररवाई की रिपोर्ट भी तलब की है।
PIL पर केंद्र व दिल्ली सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी
दरअसल, सत्य निकेतन में कल हुई उस घटना के बाद एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई, जिसमें लड़कों के PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतें ढह गई थीं। इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे। हाई कोर्ट ने इस याचिका का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की और केंद्र, दिल्ली सरकार, एमसीडी, दिल्ली पुलिस, NHRC व डीयू को नोटिस भी जारी की है।
मामले में अगली सुनवाई 25 सितम्बर को
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है। उन्होंने कहा कि MCD को इस दिशा में कुछ करना चाहिए। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे। मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी।
हाई कोर्ट ने पूछा- कोई नियामक है या नहीं
हाई कोर्ट ने एमसीडी के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह जांच कर पता लगाएं कि संबंधित बिल्डिंग में जो निर्माण कार्य हो रहा था, उसके लिए इजाजत ली गई थी या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यदि अनुमति नहीं ली गई थी तो उसके लिए संबंधित अधिकारी की भी जिम्मेदारी तय की जाए। कोर्ट ने रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि क्या दिल्ली में पीजी फैसेलिटीज को रेगुलेटर करने के लिए कोई नियामक है या नहीं। यदि नियामक नहीं हैं तो एमसीडी इसे तुरंत बनाए।
छात्रों के लिए रहने के लिए PG सुविधा नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के लिए प्रथम दृष्टया केवल बिल्डिंग मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, संबंधित सभी एजेंसियां बराबर जिम्मेदार हैं। अदालत ने कहा कि यह आम जानकारी है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी अपने बाहरी छात्रों के लिए पर्याप्त रहने की सुविधा नहीं देती है। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों के लिए PG जैसी सुविधाओं का इंतजाम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में नहीं छोड़ी जाएगी कसर
हाई कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वह अपनी कोशिशों को डबल कर दें, ताकि ऐसे हादसों में मानव जीवन खतरे में न पड़े। अदालत ने इस मामले की अल्प सुनवाई की, लेकिन आदेश डिटेल में लिखाया जा रहा है। वहीं एमसीडी की तरफ से दावा किया गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।


