Bio-Pharma Park : अब पीलीभीत में बनेंगी वैक्सीन और इंसुलिन! योगी सरकार ने तैयार किया बड़ा प्लान

लखनऊ, 4 नवंबर। उत्तर प्रदेश में फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी उद्योग को नई रफ्तार देने के लिए योगी सरकार पीलीभीत में 200 एकड़ क्षेत्रफल में बायो-फार्मा पार्क विकसित करेगी। इसके लिए अमरिया तहसील के भरा पचपेड़ा में विकसित हो रहे 951.79 एकड़ के औद्योगिक क्षेत्र में भूमि चिह्नित की गई है। यहां वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसी आधुनिक जैविक औषधियों के निर्माण से जुड़ी इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार की योजना इस क्षेत्र को बायोटेक्नोलॉजी आधारित विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की है। इससे फार्मा क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

951 एकड़ में विकसित हो रहा औद्योगिक क्षेत्र

उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के निदेशक एवं विशेष विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि औद्योगिक विकास को बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्रीय स्तर पर निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में 575.79 एकड़ भूमि औद्योगिक भूखंडों के लिए निर्धारित है। इसके अलावा 60.98 एकड़ में कॉमन फैसिलिटी, 109.23 एकड़ में ग्रीन एरिया और 96.20 एकड़ में सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। फिलहाल यहां 14 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध हैं।

वैक्सीन से लेकर जीन थेरेपी तक का होगा उत्पादन

प्रस्तावित बायो-फार्मा पार्क में सामान्य फार्मा फॉर्मूलेशन के साथ जैव प्रौद्योगिकी आधारित उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के निर्माण से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने की योजना है। परियोजना में बायोटेक्नोलॉजी संस्थान, कौशल विकास और इंक्यूबेशन के लिए विशेष विंग विकसित करने का भी प्रस्ताव है। इससे युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण मिल सकेगा। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ेंगे।

नेपाल सीमा से नजदीकी और रेल कनेक्टिविटी बनेगी ताकत

पीलीभीत की नेपाल सीमा से निकटता और रेल कनेक्टिविटी को इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र पीलीभीत शहर से करीब 36 किलोमीटर, बरेली से 100 किलोमीटर और लखनऊ व दिल्ली से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। बेहतर कनेक्टिविटी से कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, भविष्य में यहां निर्मित उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

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