Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा, 13 जिलों में 29 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

पटना, 8 सितंबर: बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ का संकट गंभीर बना हुआ है। गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत राज्य की कई प्रमुख नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने से निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

जल संसाधन विभाग की मंगलवार सुबह 6 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्थानों पर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से करीब एक से तीन मीटर तक ऊपर दर्ज किया गया है। इनमें पुनपुन नदी की स्थिति सबसे चिंताजनक बनी हुई है।

पुनपुन नदी खतरे के निशान से करीब 3 मीटर ऊपर

श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर 53.55 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 50.60 मीटर है। यानी नदी 2.95 मीटर ऊपर बह रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थान पर जलस्तर में बढ़ोतरी का रुझान जारी है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर भी खतरे के निशान से काफी ऊपर है। यहां नदी का जलस्तर 38.56 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 36.58 मीटर है। यानी नदी 1.98 मीटर ऊपर बह रही है और जलस्तर बढ़ रहा है।

गंगा भी कई जगह खतरे के निशान से ऊपर

गंगा नदी भी बिहार में कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। दीघा घाट में जलस्तर 51.54 मीटर, गांधी घाट में 50.31 मीटर और हाथीदह में 43.41 मीटर दर्ज किया गया। इन स्थानों पर गंगा क्रमश: 1.09 मीटर, 1.71 मीटर और 1.65 मीटर खतरे के निशान से ऊपर है। हालांकि पटना और हाथीदह में जलस्तर में फिलहाल गिरावट का रुझान दर्ज किया गया है।

वहीं, गंगा के निचले इलाकों में स्थिति अलग है। मुंगेर में नदी का जलस्तर 40.08 मीटर, भागलपुर में 34.60 मीटर और कहलगांव में 32.77 मीटर दर्ज किया गया। इन स्थानों पर गंगा खतरे के निशान से क्रमश: 0.75 मीटर, 0.92 मीटर और 1.68 मीटर ऊपर बह रही है।

कोसी और गंडक का भी बढ़ रहा जलस्तर

कोसी नदी भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर है। बलतारा में इसका जलस्तर 35.15 मीटर, जबकि कुरसेला में 31.40 मीटर दर्ज किया गया। दोनों जगह जलस्तर में वृद्धि का रुझान है। बलतारा में कोसी खतरे के निशान से 1.30 मीटर और कुरसेला में 1.40 मीटर ऊपर बह रही है। इसी तरह गंडक नदी भी डुमरिया घाट और हाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है। डुमरिया घाट में जलस्तर 62.75 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के निशान से 0.53 मीटर ऊपर है। हालांकि यहां जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है।

बागमती और घाघरा भी खतरे के निशान से ऊपर

मुजफ्फरपुर में बागमती नदी का जलस्तर 48.93 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 0.25 मीटर ऊपर है। यहां नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बताया गया है। इसके अलावा घाघरा नदी भी दरौली और गंगपुर सिसवन में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इससे आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में गिरावट

जल संसाधन विभाग के अनुसार, प्रमुख बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में फिलहाल गिरावट का रुझान है। मंगलवार सुबह के आंकड़ों के मुताबिक, बीरपुर बैराज से कोसी का डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज 1,77,880 क्यूसेक, वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक का 1,04,400 क्यूसेक और इंद्रपुरी बैराज से सोन नदी का 1,02,574 क्यूसेक दर्ज किया गया। हालांकि कई नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण प्रशासन की चुनौती कम नहीं हुई है।

13 जिलों में 29 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित

बढ़े हुए जलस्तर का असर बिहार के बड़े हिस्से पर पड़ा है। नदियों में उफान के कारण राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों की 438 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत करीब 29.13 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान तेज किया गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही राहत सामग्री, भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने का काम जारी है।

तटबंधों और नदियों की लगातार निगरानी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंधों और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खास तौर पर गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक और पुनपुन के उन इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, जहां जलस्तर बढ़ने का रुझान सामने आया है। फिलहाल बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में गिरावट राहत की बात है, लेकिन कई नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का संकट अभी बना हुआ है।

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