लखनऊ, 2 सितंबर। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी ली जाती है। 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 10:15 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी।
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:22 बजे और सूर्यास्त शाम 6:09 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:41 बजे, जबकि चंद्रास्त दोपहर 1:00 बजे होगा। सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त को 27 नक्षत्रों में 13वां नक्षत्र माना गया है। इसका संबंध चंद्रमा से है और इसकी राशि कन्या बताई गई है।
2 अक्टूबर का शुभ योग और मुहूर्त
शुक्रवार को हर्षण योग रात 8:52 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार हर्षण योग को प्रसन्नता और आनंद से जुड़ा शुभ योग माना जाता है। इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और नए काम की शुरुआत जैसे कार्यों को अनुकूल माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है।अमृतकाल: सुबह 6:40 बजे से 8:10 बजे तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा और अन्य शुभ गतिविधियां करना अनुकूल माना जाता है।
आज का राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
राहुकाल: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक। इस अवधि में नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की मान्यता है। हालांकि, पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
गुलिक काल: सुबह 7:51 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यमगंड काल: दोपहर 3:13 बजे से 4:41 बजे तक रहेगा। इसे भी नए कार्य, महत्वपूर्ण यात्रा और अन्य शुभ शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
2 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कन्या राशि में सूर्य की स्थिति व्यक्ति को योजनाबद्ध और व्यावहारिक तरीके से काम करने की प्रेरणा देती है। वहीं, चंद्रमा दोपहर 3:40 बजे तक वृषभ राशि में रहेगा। ज्योतिष में वृषभ राशि को चंद्रमा की उच्च राशि माना जाता है। इसके बाद चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेगा।
आज का दिशाशूल
शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो परंपरागत रूप से दिशाशूल से जुड़े उपाय किए जाते हैं।
2 अक्टूबर 2026 पंचांग: एक नजर में
दिन: शुक्रवार
माह: आश्विन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: षष्ठी सुबह 10:15 बजे तक, फिर सप्तमी
सूर्योदय: सुबह 6:22 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:09 बजे
चंद्रोदय: रात 10:41 बजे
चंद्रास्त: दोपहर 1:00 बजे
हर्षण योग: रात 8:52 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:52 AM–12:39 PM
अमृतकाल: 6:40 AM–8:10 AM
राहुकाल: 10:47 AM–12:16 PM
गुलिक काल: 7:51 AM–9:19 AM
यमगंड: 3:13 PM–4:41 PM
दिशाशूल: पश्चिम
नोट: पंचांग के मुहूर्त और काल स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के आधार पर बदल सकते हैं, इसलिए किसी विशेष शहर के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित है।


