By Varsha Pargat
पश्चिम बंगाल के लोगों ने भारत को विजय दिलवाया. कई महीनो से लगातार सभी सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा थी “क्या बंगाल बदलाव में आएगा?” बंगाल की जनता ने पहली बार अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और बदलाव लाकर दिखाया . लगभग 50 साल तक बंगाल दमन और दबंगई के वातावरण में जी रहा था .कल के विजय से मानो उन्होंने पहली बार स्वतंत्रता का आनंद मनाया, कुछ ऐसी ही तस्वीर हर गली और आंगन से आ रही है.
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जबरदस्त रणनीति ने बंगाल ने बदलाव लाया है. लगातार कई वर्षों से बंगाल में बदले की राजनीति चलती रही. हिंसा और अत्याचार के बिना बंगाल में चुनाव होते ही नहीं थे. पहली बार बंगाल में चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए . इसका पूरा श्रेय हमारे जवान औरCentral Forces को जाता है. उनके परिश्रम को प्रणाम करना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी जी ने कल संबोधन जो किया उसके कई मायने निकाले जा सकते हैं. उन्होंने अपनी जीत को नया सूर्योदय कहा है और साथ-साथ यह जीत को डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को समर्पित किया है. नया सूर्योदय अर्थात एक नई शुरुआत बंगाल में होने जा रही है. बंगाल में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व लौट आया है. बंगाल की धरती से ही राष्ट्रवाद का नारा निकला और भारत में फैला.
इसकी शुरुआत की थी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जिन्होंने ‘वंदे मातरम’ लिखा और अपने गीत में भारत माता को एक देवी के रूप में पूजा.डॉ मुखर्जी ने ‘जन संघ’ की स्थापना की और राष्ट्रवाद की प्रेरणा पूरे भारत को दी. स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, अरविंदो. नेताजी सुभाष चंद्र बोस, कई महान लोगों ने बंगाल से राष्ट्रवाद का प्रचार प्रसार किया.
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लेकिन दुर्भाग्य से बंगाल उन हाथों में चला गया जिन्होंने फिर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को कुचलने का प्रयास जारी रखा. कांग्रेस,लेफ्ट और टीएमसी ने इतने सालों तक हिंदुत्व को दबाया. इन लोगों ने मुसलमानों को रुझाने के लिए नीति अपनाई. इसका परिणाम भी हुआ कि केवल 30% लोग 70% पर हावी हो गए. बंगाल दहशत और अन्याय के अंधेरे में जी रहा था. बंगाल से उद्योग, व्यापार होना बंद हो गया . प्रगति ठप हो गई और सिर्फ चल रहा था भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण . बंगाल की डेमोग्राफी तेजी से बदली और अब तो ऐसा लग रहा था कि अगर ममता सरकार फिर से जीत जाएगी तो क्या बंगाल बांग्लादेश बनेगा?.
बंगाल की जनता को अपने त्यौहार मनाना मुश्किल हो रहा था. बंगाल में “जय श्रीराम” बोलना मना था. कई सारे मंदिरों में पूजा नहीं हो रही थी. पुलिस, प्रशासन और गुंडागर्दी के दमन को बंगाल झेल रहा था. मतदान का अधिकार भी छीना जा रहा था. इन सारी परिस्थितियों में जनता ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को चुना और अपने अस्तित्व को खतरे से बचाया.
बंगाल की यह जीत ऐतिहासिक मानी जाएगी .बंगाल ने हमेशा इतिहास लिखा. जब-जब बंगाल जगा है, हिंदू जगा है , हिंदुस्तान जगा है. Comminist, Congress और ममता सरकार हो इन सभी ने सनातन धर्म मिटाने की कोशिश की, पर आज जो दिखा है कि जो सनातन को मिटाना चाहते थे वह खुद उखड़ गए.
हिंदुत्व मतलब सनातन और हजारों सालों से कितने ही लोगों ने सनातन पर आक्रमण किया उसे मिटाना चाहा. पर सनातन धर्म टिका रहा, खड़ा रहा और खड़ा रहेगा .इसका कारण है कि वह हमारी आत्मा है, हमारे मानस में है, हमारे विचारों में है और हमारी हर सांस में है.
अगर हम दुनिया भर का इतिहास देखते हैं तो कई सभ्यता और संस्कृति को नष्ट होते हुए देखा है. आक्रांताओं ने वहां अपनी संस्कृति और धर्म स्थापित किया और उन देशों का नाम सभ्यता और संस्कृति ही बदल डाली. हिंदुस्तान एकमात्र ऐसा देश है जो आज भी अड़ा है, खड़ा है और सदैव खड़ा रहेगा.
बंगाल की जनता ने फिर से साबित करके दिखाया अपनी संस्कृति, पहचान, अपना धर्म और अपना अस्तित्व बचाने के लिए सारे हिंदू एक हुए और मतदान किया जिसका परिणाम हमारे सामने है.
बंगाल के हिंदुओं ने जो फैसला किया वह इतिहास हमेशा याद रखेगा .जब-जब हिंदू धर्म या सनातन धर्म पर संकट छाया है किसी न किसी रूप में क्रांति आई है. इसका उदाहरण स्वामी विवेकानंद है जिन्होंने हिंदुओं को, सनातन धर्म को पुनर्जागृत किया. चेतना जागी और हिंदू होने का अर्थ पूरी दुनिया को समझाया. आज फिर से “नरेंद्र” ने सामान्य हिंदुओं से लेकर लेखक, साहित्तिक , विचारवंत और बुद्धिजीवियों को सोचने पर मजबूर किया है और आत्मविश्वास भरा है. इसलिए अब हम परिवर्तन देख रहे हैं. फिर से पुनर्जागरण की गंगा बहती हुई दिख रही है, जो गंगासागर तक जाकर पहुंचेगी. यह घटना ऐतिहासिक भी मानी जाती है, जिसने हिंदू और हिंदुत्व को फिर से एक नया जीवन बंगाल में दिया और बंगाल हमेशा क्रांति का प्रेरक बनता रहा है.
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