दीपावली, 8 नवंबर, 2026 पंचांग: हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा या नए काम की शुरुआत से पहले तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। रविवार को दीपावली का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। आइए जानते हैं रविवार का विस्तृत पंचांग, लक्ष्मी पूजा का समय, राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शनिवार सुबह 10:48 बजे से शुरू होकर रविवार सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि आरंभ होगी, जो 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।
रविवार को सूर्योदय सुबह 6:40 बजे और सूर्यास्त शाम 5:41 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 5:34 बजे और चंद्रास्त शाम 4:54 बजे रहेगा।
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा। वहीं, प्रदोष काल शाम 5:41 बजे से रात 8:17 बजे तक रहेगा। रात्रि में निशिता काल पूजा का समय रात 11:44 बजे से मध्यरात्रि 12:36 बजे तक निर्धारित है। कार्यालय या प्रतिष्ठान में पूजा करने के लिए दोपहर 1:26 बजे से 2:54 बजे तक का समय शुभ रहेगा।
रविवार का नक्षत्र और योग
पंचांग के अनुसार, रविवार को सूर्य विशाखा नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं। इस नक्षत्र को महत्वाकांक्षा, नेतृत्व क्षमता, प्रतिस्पर्धा और लक्ष्य प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस नक्षत्र का प्रभाव व्यक्ति को राजनीति, प्रशासन, प्रबंधन और अन्य प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
रविवार तड़के 3:27 बजे से आयुष्मान योग रहेगा, जो सोमवार सुबह 3:02 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र में आयुष्मान योग को 27 नित्य योगों में तीसरा योग माना जाता है। इसे स्वास्थ्य, ऊर्जा, सकारात्मकता और दीर्घायु से जोड़कर देखा जाता है।
अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
रविवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे दिन के सबसे शुभ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण निर्णय और शुभ कार्य करना फलदायी माना जाता है।
वहीं, अमृतकाल रात 10:01 बजे से 11:43 बजे तक रहेगा। इसे शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ, नए व्यापार की शुरुआत, निवेश और महत्वपूर्ण कार्य करना लाभकारी हो सकता है।
रविवार को राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। रविवार को इनका समय इस प्रकार रहेगा:
- राहुकाल: शाम 4:18 बजे से 5:41 बजे तक।
- यमगंड काल: दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक।
- गुलिक काल: दोपहर 2:55 बजे से शाम 4:18 बजे तक।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए काम की शुरुआत करने से बचना चाहिए। यमगंड काल को भी शुभ कार्यों के लिए प्रतिकूल माना जाता है। वहीं, गुलिक काल में नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है, हालांकि पहले से चल रहे काम जारी रखे जा सकते हैं।
रविवार को सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
रविवार को सूर्य तुला राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना गया है। मान्यता है कि इस स्थिति में व्यक्ति के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और नेतृत्व से जुड़े पहलुओं पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए संतुलन और धैर्य बनाए रखना बेहतर माना जाता है।
वहीं, चंद्रमा भी तुला राशि में रहेंगे। तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं, जिन्हें प्रेम, सौंदर्य, कला और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, तुला राशि में चंद्रमा का गोचर व्यक्ति को मिलनसार, आकर्षक, कलाप्रेमी और संतुलित स्वभाव वाला बना सकता है। इस दौरान रिश्तों और सामाजिक मेल-जोल को महत्व देने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
रविवार को किस दिशा में रहेगा दिशाशूल?
रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है। इसलिए रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यह धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।
नोट: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। यहां दिए गए मुहूर्त और समय उपलब्ध पंचांग विवरण पर आधारित हैं। किसी भी पूजा या शुभ कार्य से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य कर लें।


