चेन्नई, 29 अक्टूबर। तमिलनाडु के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने 634 करोड़ रुपये के कथित ‘नौकरी के बदले पैसे’ घोटाले के सिलसिले में पूर्व मंत्री एवं द्रमुक नेता के एन नेहरू से जुड़े 25 ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया। मद्रास उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश पर नेहरू एवं अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया था। ईडी ने सबसे पहले अक्टूबर 2025 में तमिलनाडु पुलिस को कथित अनियमितताओं की जानकारी दी थी।
एजेंसी के अनुसार, जांच इस आरोप पर केंद्रित है कि नेहरू के मंत्री रहने के दौरान नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति (एमएडब्ल्यूएस) विभाग में सरकारी पदों पर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों से कथित तौर पर व्यवस्थित तरीके से रिश्वत वसूली गई थी। डीवीएसी के अधिकारी तलाशी के दौरान संबंधित ठिकानों से दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जुटा रहे हैं। जांच का उद्देश्य कथित भर्ती घोटाले से जुड़े सबूत एकत्र करना और यह पता लगाना भी है कि रिश्वत की रकम का लेनदेन किस तरह किया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब नेहरू ने एक दिन पहले मद्रास उच्च न्यायालय के 26 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।
उच्च न्यायालय ने 26 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज किए जाने के खिलाफ नेहरू की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। डीएवीसी की कार्रवाई को द्रमुक प्रमुख एम के स्टालिन ने टीवीके सरकार द्वारा रची गयी ‘बदले की वेत्री राजनीति’ करार दिया। स्टालिन ने ‘एक्स’ पर एक लंबे पोस्ट में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था से जनता और मीडिया का ध्यान भटकाने के लिए ‘छापेबाजी का तमाशा’ रचा है। उन्होंने दावा किया कि बिगड़ती कानून व्यवस्था के कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग असुरक्षित हो गए हैं।
स्टालिन ने सत्ताधारी पार्टी को ‘वाशिंग मशीन की तमिलनाडु शाखा’ करार दिया, जो भ्रष्ट लोगों को तो अपने अंदर समा लेती है, लेकिन खास तौर पर केवल द्रमुक के पूर्व मंत्रियों को ही निशाना बनाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह तलाशी अभियान आगामी त्रिची पूर्व उपचुनाव के लिए ‘रील्स वीडियो’ बनाने और मुख्यमंत्री को मंच से ‘दमदार संवाद’ बोलने का मौका देने के लिए चलाया जा रहा है। स्टालिन ने कहा, ”द्रमुक के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता का तो नाखून भी इन छापों से नहीं डरेगा।”


