नागोया, 23 अक्टूबर। भारतीय पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने यहां पांचवें एशियाई पैरा खेलों (Aichi-Nagoya 2026 Asian Para Games) में निशानेबाजी स्पर्धाओं के अंतिम दिन शुक्रवार को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में विश्व कीर्तिमान तोड़ने के साथ मौजूदा संस्करण में अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीता।

10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में भी मोना ने जीता था स्वर्ण
मोना ने इससे पहले महिलाओं की निशानेबाजी स्पर्धाओं के पहले दिन 19 अक्टूबर को 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में खेलों के रिकॉर्ड के साथ 250 अंक लेकर स्वर्ण जीता था। उस स्पर्धा में अवनि लेखरा को रजत पदक मिला था।
2 स्वर्ण सहित 5 पदकों के साथ पैरा शूटरों का अभियान समाप्त
वहीं 20 अक्टूबर को मनीष नरवाल ने 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में रजत पदक जीता था जबकि श्रृष्टि अरोड़ा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में में कांस्य पदक हासिल किया था। इस प्रकार पैरा शूटरों ने दो स्वर्ण, दो रजत व एक कांस्य सहित पांच पदकों के साथ इन खेलों में अपने अभियान का समापन किया।
WORLD RECORD GOLD FOR MONA AGARWAL! 🇮🇳🥇🎯
TOPS athlete Mona Agarwal makes history at the #AsianParaGames2026, clinching GOLD in Women’s 50m Rifle 3 Positions SH1 with a score of 357.5, setting new WORLD and ASIAN PARA GAMES RECORDS! 🌍🔥
She becomes the first Indian para shooter to win a medal in this event at the Asian Para Games! 🇮🇳👏
With this victory, Mona wraps up her campaign with an incredible 2 GOLD MEDALS!
Two golds. Two records. One phenomenal champion! 🇮🇳🏆
#Cheer4Bharat #AsianParaGames2026 #ParaShooting #TeamIndia #WorldRecord
— SAI Media (@Media_SAI) October 23, 2026
मोना ने 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में लूटी महफिल
मोना ने 357.5 स्कोर के साथ 356 अंकों का पिछला विश्व रिकॉर्ड तोड़ा, जो स्वीडन की अन्ना बेंसन ने इसी वर्ष जुलाई में बनाया था। चीन की झांग कुइपिंग ने 353.7 अंक लेकर रजत और दक्षिण कोरिया की किम मियुंग ने 344.4 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता। मोना की सहयोगी शूटर अवनि लेखरा 333.2 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रही।
पैरा निशानेबाजी में एसएच1 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है, जिनके निचले या ऊपरी अंगों में कोई शारीरिक अक्षमता है। लेकिन जो बिना किसी गन स्टैंड या सहारे के अपने हाथों से ही बंदूक का वजन संभाल सकते हैं।


