Share Market : बढ़त के साथ खुला शेयर बाजार, फिर सेंसेक्स 560 अंक तक फिसला; IT और प्राइवेट बैंक शेयरों में दबाव

मुंबई, 19 अक्टूबर। मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई, लेकिन शुरुआती बढ़त ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। सेंसेक्स और निफ्टी 50 जल्द ही फिसलकर लाल निशान में आ गए। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक सतर्क नजर आए।

बीएसई सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 74,729.27 के बंद स्तर के मुकाबले 120 अंक यानी करीब 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,849.30 पर खुला। हालांकि, कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से यह 560 अंक यानी लगभग 0.74 प्रतिशत गिरकर 74,169.23 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी 50 ने पिछले बंद स्तर 23,146.15 के मुकाबले 23,150.85 पर कारोबार की शुरुआत की। इसके बाद बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव

व्यापक बाजार में भी कमजोरी का रुख रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.54 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि दबाव केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं था।

PSU बैंक और ऑयल-गैस शेयरों में तेजी

सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सूचकांकों में रहा और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। निफ्टी ऑयल एंड गैस में भी लगभग 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके उलट, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी आईटी और निफ्टी केमिकल्स में बिकवाली का दबाव रहा। इन सूचकांकों में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले सप्ताह निफ्टी में दर्ज 2.8 प्रतिशत की तेजी और आईटी कंपनियों के उम्मीद से बेहतर नतीजों के बाद बैंकिंग क्षेत्र की आय रिपोर्टें बाजार को सहारा दे सकती हैं। हालांकि, होर्मुज क्षेत्र में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड के 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का जिक्र किया गया, जबकि बाद में यह करीब 2 प्रतिशत गिरकर 107.76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा।

अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 100.43 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगा कच्चा तेल महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में बाजार की आगे की दिशा वैश्विक हालात और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिली उम्मीद

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार 15 कारोबारी सत्रों तक बिकवाली करने के बाद पिछले सत्र में शुद्ध खरीदार बने थे। उन्होंने करीब 1,166 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 45 सत्रों से जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ते हुए लगभग 3,661 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शेयरों के वैल्यूएशन और रुपये की चाल विदेशी निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहने पर विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर अहम

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,950 से 23,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, 23,250 से 23,300 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 52.81 पर रहा, जो इसके बताए गए औसत 34.70 से ऊपर है। वहीं, पुट-कॉल रेशियो (PCR) 1.08 दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले सत्रों में बड़े शेयरों का प्रदर्शन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर रह सकता है। दूसरी तिमाही के नतीजों के आधार पर अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार

एशियाई बाजारों में भी एकसमान रुख नहीं रहा। जापान का निक्केई सूचकांक 0.84 प्रतिशत गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.83 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ हरे निशान में थे। इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट सूचकांक 5 प्रतिशत से अधिक टूट गया। कुल मिलाकर, घरेलू बाजार की दिशा पर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के नतीजों का असर बना रह सकता है।

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