UP: राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोप पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, बोले- विदेशी ताकतों के साथ मिलकर लोकतंत्र अस्थिर करने की कोशिश

लखनऊ, 19 अक्टूबर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वह विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

ब्रजेश पाठक ने कांग्रेस पर साधा निशाना

सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ब्रजेश पाठक ने कहा कि राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्षी ‘इंडी’ गठबंधन भाजपा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से चिंतित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी संभावित चुनावी हार को देखते हुए इस तरह के बयान दे रहा है। पाठक ने दावा किया कि देश के युवा और आम नागरिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत और 2029 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिर से सरकार बनने का भरोसा भी जताया। उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को लोकतंत्र तथा जनता की राय का सम्मान करने की सलाह दी।

राहुल गांधी ने मोदी, शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए आरोप

इससे पहले राहुल गांधी ने गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम में एक बार फिर ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में इनकी भूमिका है। राहुल गांधी ने दावा किया कि जनता सरकार की सच्चाई जान चुकी है और मौजूदा सरकार का राजनीतिक दौर समाप्त होने वाला है।

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर राजनीतिक घमासान

राहुल गांधी के आरोपों और ब्रजेश पाठक के जवाब ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव को फिर सामने ला दिया है। जहां राहुल गांधी चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता उनके आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साध रहे हैं। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच चुनावी प्रक्रिया से जुड़े दावों का आकलन आधिकारिक तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित संस्थाओं के जवाब के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण है।

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