पेशावर, 22 सितंबर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KP) में सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रांतीय मंत्री फजल शकूर खान को लेकर विवाद गहरा गया है। पीटीआई नेताओं ने आरोप लगाया है कि सादे कपड़ों में आए लोगों ने उनकी गाड़ी को रोका और टायरों पर फायरिंग के बाद उन्हें अपने साथ ले गए। वहीं, उपलब्ध रिपोर्टों में इस कार्रवाई को लेकर गिरफ्तारी और कथित अपहरण, दोनों तरह के दावे सामने आए हैं। घटना के बाद खैबर पख्तूनख्वा की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। प्रांतीय विधानसभा में इस मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विधानसभा ने फजल शकूर की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे अपहरण करार दिया और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए।
गाड़ी के टायरों पर फायरिंग का दावा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक फजल शकूर एमपीए हॉस्टल से मुख्यमंत्री आवास में एक बैठक के लिए निकले थे। इसी दौरान कथित तौर पर सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने उनकी गाड़ी को रोका। सामने आए एक वीडियो के बारे में रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसमें नकाबपोश लोग गाड़ी के टायरों पर फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं। पीटीआई नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने सरकार पर लगाए आरोप
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने पीटीआई नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पार्टी का राजनीतिक आंदोलन कमजोर नहीं होगा। उन्होंने फजल शकूर की गाड़ी पर हमले और उन्हें कथित तौर पर ले जाने का आरोप लगाया। अफरीदी ने कहा कि यदि किसी को लगता है कि दबाव और कार्रवाई के जरिए पीटीआई के आंदोलन को रोका जा सकता है, तो यह गलतफहमी है।
शकील अहमद को लेकर भी सामने आया विवाद
पीटीआई नेताओं ने एक अन्य प्रांतीय मंत्री शकील अहमद से जुड़ी घटना का भी उल्लेख किया है। रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को बटखेला बाईपास पर शकील अहमद के काफिले से जुड़ी फायरिंग की घटना सामने आई थी। इस मामले में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) की ओर से शकील अहमद और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है। दूसरी ओर, शकील अहमद ने भी अज्ञात हथियारबंद लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवेदन दिया है। यानी इस घटना को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
विधानसभा में गूंजा फजल शकूर का मामला
फजल शकूर की कार्रवाई को लेकर खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा का सत्र बुलाया गया। विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती की अध्यक्षता में हुई बैठक में मामले पर सरकार की ओर से पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए। कानून मंत्री आफताब आलम ने कहा कि लगातार ऐसी घटनाओं से यह संदेश जा रहा है कि प्रांतीय सरकार की कोई हैसियत नहीं है। विधानसभा में पुलिस के अधिकारों को सीमित करने की मांग का भी उल्लेख हुआ। अध्यक्ष ने कथित गिरफ्तारी का वीडियो भी सदन में दिखाया और कहा कि यदि किसी के खिलाफ मामला दर्ज है तो कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी विवाद है। पीटीआई और प्रांतीय सरकार के नेताओं ने पुलिस तथा प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए हैं, जबकि घटना की परिस्थितियों और कार्रवाई की आधिकारिक प्रकृति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। फिलहाल फजल शकूर के मामले में सामने आए आरोपों और कार्रवाई की परिस्थितियों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मामले की आगे की जांच और आधिकारिक बयानों से तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।


